बांग्लादेशी सेना का कारोबार में दख़ल

  • 15 अगस्त 2010
बांग्लादेश की सेना
Image caption बांग्लादेश की सेना ने करीब 50 करोड़ डॉलर का कारोबार फैला रखा है.

बांग्लादेश की सेना देश की राजनीति में अहम भूमिका निभाती रही है, लेकिन अब उसका दख़ल कारोबार के क्षेत्र में भी बढ़ता जा रहा है.

पाकिस्तानी सेना के नक़्शेकदम पर चलते हुए वो अब अपने पाँव अर्थव्यवस्था के सभी बड़े क्षेत्रों तक फैला रही है.

इस बात के प्रमाण आसानी से देखे जा सकते हैं कि सेना के पास पर्याप्त धन है और उसका खासा प्रभाव भी है.

सेना का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है. एक अनुमान के मुताबिक उसकी क्षमता कम से कम 50 करोड़ डॉलर की है.

ढाका स्थित पाँच सितारा रैडिसन होटल पर अब 'बांग्लादेश आर्मी वेल्फेयर ट्रस्ट' का मालिकाना हक़ है. इस होटल को सेना की ज़मीन पर बनाया गया था. होटल का इस्तेमाल नज़दीकी आर्मी के गोल्फ कोर्स के अतिथि करते हैं.

ढाका रैडिसन होटल की सफलता को देखते हुए 'बांग्लादेश आर्मी वेल्फेयर ट्रस्ट' अब चिटगांव के बंदरगाह शहर में एक और पांच सितारा होटल बना रही है.

मुनाफ़े का सौदा

एक जाने माने होटल व्यवसायी ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि एक तरफ जहां ढाका में ज़मीन के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं सस्ती ज़मीन ख़रीदने और उसके इस्तेमाल से सेना को बाकी व्यवसायियों की तुलना में साफ़ तौर पर आर्थिक मुनाफा हो रहा है.

इन दिनों सेना का एक अन्य कारोबार 'ट्रस्ट बैंक' का है. यह कारोबार अब पूरी तरह से व्यावसायिक बैंक के रूप में तब्दील हो चुका है. देश भर में अब तक 40 शाखाएँ खुल चुकी हैं.

सेना समर्थित कार्यवाहक सरकार ने साल 2007 में इसे विशेष अधिकार भी दे दिए. यह बैंक अब पासपोर्ट के लिए शुल्क भी ले सकता है.

पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह अकबर अली खान का कहना है, "सेना का यह क़दम सरकारी नियमों के ख़िलाफ़ है. इन नियमों में कहा गया है कि सबसे सस्ती और अच्छी पासपोर्ट सेवा सुनिश्चित किए जाने के लिए एक खुली निविदा प्रक्रिया होनी चाहिए."

सेना के अलग-अलग दल इन बैंको का संचालन कर रहे हैं. बांग्लादेश की नागरिक सुरक्षा सेना 'अंसार एंड विलेज डिफेंस पार्टी बैंक' का संचालन करती है. इस बैंक के पास बैंकिंग लाइसेंस तक नहीं है और यह ऋण देने वाली संस्था के तौर पर काम करती है.

बढ़ता दखल

Image caption ढाका स्थित रैडिसन होटल को सेना की जमीन पर बनाया गया है

सेना का कारोबार केवल यहीं तक सीमित नहीं. अगर आप बांग्लादेश के गाँवों से आइसक्रीम खरीद रहे हैं तब भी हो सकता है कि आप सेना के किसी कारोबार का उत्पाद खरीद रहे हों.

सेना कल्याण संगठन ऐसा ही एक संगठन है जो खाद्य पदार्थों, कपड़े, जूट, बिजली के उपकरण, रियल एस्टेट और यातायात के क्षेत्र में कारोबार करता है.

बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक कारोबार के क्षेत्र में सेना की महत्वाकांक्षा बढ़ती ही जा रही है और अब यह पावर प्लांट और बीमा के क्षेत्र में भी पैर पसारने की योजना बना रही है.

दुष्परिणाम

कारोबार में सेना के दख़ल के कई दुष्परिणाम भी सामने आए हैं. बांग्लादेश राइफल्स के जवानों ने साल 2009 में सैन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर विद्रोह किया था.

इसकी जाँच कर रहे आयोग के अनुसार उपभोक्ता वस्तुओं की खुदरा बिक्री में लगे सैन्य अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त थे.

जवानों में इस बात को लेकर काफ़ी असंतोष था. आयोग के अध्यक्ष एम अनीसुज्ज़मान खान ने कहा, "सेना का काम देश की सुरक्षा करना है न कि कारोबारी इकाइयाँ या फैक्ट्रियाँ चलाना."

आयोग ने सुझाव दिया है कि सेना को कारोबारी गतिविधियों में शामिल होने की इजाज़त नहीं मिलनी चाहिए.

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