हाथियों के लिए हड़ताल

हाथी

ये कुछ अलग तरह की हड़ताल है. श्रीलंका में वन्य अभयारण्यों में तैनात पशु चिकित्सक हाथियों के पक्ष में हड़ताल पर चले गए हैं.

श्रीलंका के पशु चिकित्सकों का कहना है कि सरकार जंगली हाथियों और लोगों के बीच संघर्ष को रोकने में नाकामयाब रही है. इसके विरोध में सभी 11 वेटरनेरी सर्जन हड़ताल पर चले गए हैं.

श्रीलंका में जंगली हाथियों की संख्या घटकर चार हज़ार रह गई है क्योंकि इन जानवरों के लिए संरक्षित क्षेत्रों पर लोगों का क़ब्ज़ा होता जा रहा है.

पिछले साल हिंसक जंगली हाथियों ने लगभग 50 लोगों की जान ले ली थी. पिछले शनिवार को ही हाथियों ने दो बुजर्गों को निशाना बनाया था.

दूसरी ओर लगभग 228 हाथियों को लोगों ने निशाना बनाया.

दरअसल लोग संरक्षित क्षेत्रों में बिजली के तार लगा देते हैं और झटका लगने की वजह से हाथी उत्तेजित हो जाते हैं.

समस्या

पशु चिकित्सक संघ के सचिव विजेता परेरा ने बीबीसी से कहा कि मुख्य समस्या ये है कि हाथियों के खाने-पीने के स्थानों का अतिक्रमण हो रहा है और सरकार इस दिशा में कुछ नहीं कर रही है.

उनका कहना है कि घरेलू जानवर संरक्षित क्षेत्र में हाथियों के क्षेत्रों में चर रहे हैं और हाथियों को दूर रखने के लिए पटाखों का इस्तेमाल किया जा रहा है जिनसे ये जानवर बहरे होते जा रहे हैं.

विजेता परेरा का कहना है कि हर सप्ताह लगभग चार हाथी मारे जा रहे हैं.

हालांकि श्रीलंका सरकार ने हाथियों के संरक्षण के लिए कुछ क़दम उठाए हैं और कुछ हाथियों को बड़े पार्को में पहुँचाया गया है.

वन्यजीव विभाग के महानिदेशक आनंदा विजयसूर्या का कहना है कि पशु चिकित्सकों ने उनसे बात करने से इनकार कर दिया है और कहा है कि वो इस मुद्दे पर उनसे नहीं, मंत्री से बात करना चाहते हैं.

उल्लेखनीय है कि वन्यजीव विभाग नए मंत्रालय के अधीन आता है और इस विभाग के मंत्री राष्ट्रपति राजपक्षे के भाई हैं.

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