लाखों लोगों से मदद अभी भी दूर

Image caption लाखों लोग घरबार छोड़कर भाग रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है पाकिस्तान के 60 लाख से भी ज़्यादा बाढ़ प्रभावित लोगों में से लाखों ऐसे हैं जिन्हें अबतक कोई मदद नहीं मिल पाई है.

टूटे हुए पुल और बंद पड़ी सड़कों की वजह से राहत में मुश्किलें आ रही हैं और विश्व खाद्य कार्यक्रम संगठन दस लाख से भी कम लोगों तक ही ज़रूरी सामान पहुंचा सका है.

इस बीच कई देशों ने कुल मिलाकर 30 करोड़ डॉलर की सहायता राशि देने का वादा किया है.

जिनेवा स्थिति संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पाकिस्तान के राजदूत ज़मीर अकरम ने कहा है कि पाकिस्तान में इंग्लैंड जितना बड़ा क्षेत्र पानी में डूबा हुआ है और इसके पुनर्निर्माण में बरसों लगेंगे.

सहायताकर्मियों का कहना है कि पिछले एक हफ़्ते से राहत सामग्री पहुंचाने के काम में तेज़ी आई है.

लेकिन समस्या ये है कि वो एक ऐसी आपदा से जूझ रहे हैं जो हर गुज़रते दिन के साथ नए इलाकों के बाढ़ग्रस्त होने की वजह से भीषण होती जा रही है.

उनका कहना है कि आपूर्ति और ज़रूरत की खाई को पाटने के लिए जितने धन की ज़रूरत है वो भी उपलब्ध नहीं है.

ज़मीर अकरम का कहना है कि लगता है जैसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय अभी भी स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ पाया है.

जाने माने पाकिस्तानी टीकाकार नसीम ज़ेहरा पाकिस्तान के दक्षिणी प्रांत सिंध के बाढ़ग्रस्त इलाकों के दौरे से लौटे हैं.

उनका कहना है, “पानी ऐसे बढ़ रहा है जैसे कई सिरों वाला हाइड्रा. हज़ारों लाखों लोग अपना घर छोड़कर निकले हुए हैं, सड़के के किनारे लेटे हुए हैं और उन्हें कुछ नहीं मालूम कि अब कहां जाएंगे. हम कई ऐसी जगहों पर रूके जहां लोगों को कई दिनों से खाना नहीं मिला था. इनमें छोटे छोटे बच्चे, औरतें और बूढ़े लोग भी थे. इन लोगों पर सबसे ज़्यादा मार पड़ी है.”

इस तरह की कहानियां कई इलाकों से सुनने में आ रही हैं कि लोग घरबार छोड़कर निकल आए हैं और उनके पास गुज़ारा करने को कुछ नहीं है.

कई जगह लोग सरकार से मदद मांगने के लिए विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं.

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