ताज़ा चेतावनी, पाक में संकट गहराया

बचाव कार्य

पिछले तीन हफ़्तों से बाढ़ से ग्रस्त पाकिस्तान में बाढ़ की ताज़ा चेतावनियाँ जारी की गई हैं और संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि 60 लाख लोगों को तत्काल मदद की ज़रूरत है लेकिन वे अभी भी मदद से वंचित हैं.

पाकिस्तान में बाढ़ से लगभग दो करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं. अब तक मरने वालों की संख्या 1600 है.

यूरोपीय संघ ने तीन करोड़ 90 लाख डॉलर की अतिरिक्त सहायता देने की घोषणा की है जिसे मिलाकर अब तक क़रीब नौ अरब डॉलर की अंतरराष्ट्रीय सहायता मिल चुकी है.

ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्री एंड्रयू मिचेल ने पाकिस्तान की यात्रा के दौरान कहा है कि इतने बड़े नुक़सान से कोई भी देश हिल जाएगा, उन्होंने कहा है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने संकट का सामना करने में उम्मीद से ज़्यादा तेज़ी और मुस्तैदी दिखाई है.

उन्होंने इन आलोचनाओं को सही ठहराया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से मिलने वाली सहायता धीमी रही है.

बाढ़ग्रस्त पाकिस्तान में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिल मैक्गिवरिंग के अनुसार सिंध प्रांत के उत्तर-पश्चिमी भाग में बाढ़ की ताज़ा चेतावनी जारी होने के बाद हज़ारों लोग अपने घरों को छोड़ कर भाग रहे हैं.

उधर पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वासन दिलाने की कोशिश की है कि बाढ़ प्रभावितों के मदद के लिए दी जा रही धन-राशि और अन्य सामग्री चरमपंथियो के हाथ नहीं लगेगी.

ये आश्वासन तब दिया गया है जब संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि बाढ़ प्रभावितों की सहायता के लिए 46 करोड़ डॉलर की राशि में से उसे अब तक आधे से भी कम धन-राशि मिली है.

अनेक शहरों में हाई अलर्ट

जिल मैक्गिवरिंग के अनुसार हाल के दिनों में हुई भारी बारिश की वजह से देश के अनेक हिस्सों में बाढ़ का ख़तरा बढ़ गया है.

सिंध और बलूचिस्तान की सीमा पर स्थित अनेक शहरों को 'हाई अलर्ट' पर रखा गया है.

इसका कारण ये है कि ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही सिंधु नदी में दक्षिणी पाकिस्तान की ओर बह रहा पानी तटबंध तोड़कर आसपास के क्षेत्र में भर सकता है.

अनेक जगहों पर तो पानी तटबंध तोड़कर रिहायशी इलाक़ों और खेतों में घुस गया है.

Image caption संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 60 लाख लोगों तक मदद नहीं पहुँची है

प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुँचाने में ख़ासी मुश्किलें पेश आ रही हैं क्योंकि देश का मूलभूत ढांचा क्षतिग्रस्त है, सड़के और पुल टूट गए हैं या फिर भूस्खलन के कारण इस्तेमाल के योग्य नहीं हैं.

तालिबान के हाथों में नहीं पड़ेगी राशि

प्रभावित लोगों की मदद के लिए आ रही धन-राशि के चरमपंथियों के हाथों में चली जाने के डर पर पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वास्त किया है.

उनका कहना है, "मैं मदद देने वाले पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि मदद में दिए गए पैसे और सामग्री की पूरी जवाबदेही होगी. सरकार विचार कर रही है कि धन-राशि के इस्तेमाल पर निगरानी रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऑडिटर्स को नियुक्त किया जाए."

उन्होंने कहा कि सहायता की सामग्री ग़रीब लोगों के लिए हैं और उन्हें विश्वास है कि वह उन तक पहुँचेगी.

रहमान मलिक का कहना था कि उन्हें एहसास है कि राहतकर्मियों की भूमिका निभाकर तालिबान अपना प्रभाव बढ़ा सकते हैं लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसा नहीं होने दिया जाएगा.

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