नेपाल को अब भी प्रधानमंत्री की तलाश

प्रचंड और माधव कुमार नेपाल
Image caption संसद में वोट डालने के बाद प्रचंड कार्यवाहक प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल के साथ बातचीत करते हुए.

सांसदों की तथाकथित ख़रीद पर एक टेप के सामने आने के बाद नेपाल में माओवादी नेता पुष्प कमल दहल प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हार गए हैं.

नेपाल में प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए संसद में रविवार को छठवीं बार मतदान हुआ लेकिन किसी भी पार्टी का नुमाइंदा बहुमत हासिल करने में कामयाब नहीं रहा.

प्रचंड के नाम से मशहूर पुष्प कमल दहल दो वर्ष पहले देश के पहले प्रजातांत्रिक प्रधानमंत्री बने थे लेकिन रविवार को वे 599 सदस्यीय सदन में साधारण बहुमत भी हासिल नहीं कर सके.

प्रचंड को रविवार को संसद में हुए मतदान में सिर्फ़ 240 सांसदों का ही समर्थन मिल पाया. सदन में 101 प्रचंड के ख़िलाफ़ पड़े और 163 सांसदों ने अपने मत का प्रयोग नहीं किया.

नेपाल की संसद में कम्यूनिस्ट पार्टी और तराई क्षेत्र की चार पार्टियों के गुट ने रविवार को भी पहले की तरह अपनी तटस्थता बनाए रखी.

नतीजतन न तो प्रचंड और न ही नेपाली कांग्रेस के नेता राम चंद्र पोडेल बहुमत के लिए ज़रुरी 300 मत हासिल कर पाए.

सांसदों की ख़रीद पर सामने आई एक तथाकथित टेप के बाद माओवादी नेता अपनी पार्टी के भीतर विरोध के स्वर सुन चुके हैं साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी उनके रिश्तों में कड़वाहट आई है.

टेप पर विवाद

नेपाल के एक टेलीविज़न चैनल पर एक टेप प्रसारित की गई थी जिसमें पुष्प कमल दहल यानि प्रचंड को प्रधानमंत्री बनाने के लिए पचास सांसदों के वोट ख़रीदने पर बात हुई है. माओवादी नेता कृष्ण बहादुर महरा पर आरोप है कि चीनी अधिकारी से बात करने वाली आवाज़ उनकी है.

फ़ोन पर की गई बातचीत की रिकार्डिंग में तराई की मधेसी पार्टियों के नेताओं को माओवादी नेता के हक़ में वोट डालने के एवज़ में पचास करोड़ की मांग करते सुना गया है.

लेकिन बीबीसी से बातचीत में महरा ने इन आरोपों को निराधार बताया है.

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