शांति वार्ता में हिस्सा ले तालिबानः करज़ई

करज़ई
Image caption क़बायली नेताओं ने राष्ट्रपति करज़ई के शांति प्रयासों का समर्थन किया है

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने ईद के मौके पर तालिबान के नेताओं का आह्वान किया है कि वे लड़ाई बंद करें और शांति वार्ता में शामिल हों.

उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद हैं कि मुल्ला उमर शांति प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे, अपने भाई-बहनों की हत्या बंद करेंगे, बम धमाके करना बंद करेंगे और अफ़ग़ानी बच्चों, महिलाओं और पुरुषों की मौत का सिलसिला रोकने में मदद करेंगे.

उन्होंने अमरीका और नैटो के गठबंधन सहयोगियों से भी कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान के गांवों में लड़ने कि बजाय वे पाकिस्तान की सीमा पर विद्रोहियों के ठिकानों को अपना निशाना बनाएं.

उन्होंने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि नैटो सैन्य बलों को पता है कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई अफ़ग़ानिस्तान के गांवों में नहीं है."

करज़ई ईद की छुट्टी के पहले दिन प्रेसिडेंशियल पैलेस में विभिन्न मंत्रियों और अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे.

वार्ता के लिए परिषद

पिछले हफ़्ते करज़ई ने तालिबान से शांति वार्ता करने के लिए एक परिषद गठित करने की घोषणा की थी.

इसी साल जून में अफ़ग़ानिस्तान में क़बायली नेताओं के संगठन 'जिरगा' ने राष्ट्रपति हामिद करज़ई के तालिबान से शांति समझौते के प्रयासों का समर्थन किया था.

तालिबान को 2001 में अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता से बेदख़ल कर दिया गया था और तब से वो अमरीका के समर्थन वाली सरकार और विदेशी सैनिकों को हटाने के लिए लड़ रहा है.

माना जा रहा है कि इस परिषद में कुछ पुराने तालिबान विद्रोहियों के अलावा महिलाओं, विपक्षी सदस्यों और समाज के कुछ विशिष्ट व्यक्तियों को भी शामिल किया जा सकता है.

विफल प्रयास

इससे पहले तालिबान से बातचीत के लिए किए गए सभी प्रयास विफल रहे हैं.

इसका मुख्य कारण ये भी है कि तालिबान इस पर ज़ोर देते रहे हैं कि पहले विदेशी सेनाएँ देश छोड़कर वापस जाएँ.

अफ़ग़ानिस्तान में फिलहाल अमरीका और नैटो के करीब डेढ़ लाख सैनिक हैं. इनमें से ज़्यादातर सैनिक हेलमंद और कंधार प्रांत में मौजूद हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के ख़िलाफ़ लड़ाई हाल के दिनों में और तेज़ हुई है.

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