अफ़गानिस्तान में मतदान जारी

चुनावी पोस्टर

तालेबान की धमकियों के बीच अफ़गानिस्तान में लोग संसदीय चुनावों के लिए मतदान कर रहे हैं. अलग-अलग स्थानों पर अब तक हुए हमलों में छह सुरक्षाकर्मियों और कम से कम पांच लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

राजधानी काबुल में मतदान शुरु होने से ठीक पहले टीवी स्टेशन के सामने राकेट से हमला हुआ लेकिन इसमें कोई हताहत नहीं हुआ.

इसके बाद जलालाबाद और बाल्क प्रांतों में राकेट हमले हुए हैं जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई है और चार लोग घायल हैं.

बीबीसी को मिली जानकारी के अनुसार देश के उत्तरी तकहार प्रांत में हुए हमले में भी दो आम नागरिकों की मौत हो गई है.

राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने लोगों से अपील की है कि वो घरों से निकलें और वोट डालें. काबुल में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पांच साल पहले हुए मतदान की तुलना में इस बार कम संख्या में लोग घर से बाहर निकले हैं.

चुनावों में संसद के निचले सदन की 249 सीटों के लिए कुल 2500 उम्मीदवार मैदान में हैं.

पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनाव में धांधलियों के आरोपों के बाद इन चुनावों को राष्ट्रपति हामिद करज़ई के लिए विश्वसनीयता की परीक्षा माना जा रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक का कहना है कि इन चुनावों में बहुत सी कमियाँ होंगी लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि ये चुनाव संपन्न हो रहे हैं.

राष्ट्रपति करज़ई पर इन चुनावों को लेकर बड़ा कूटनीतिक दबाव है क्योंकि पिछले साल राष्ट्रपति पद के चुनाव में धाँधली को उन्होंने स्वीकार कर लिया था लेकिन उनके प्रतिद्वंद्वी अब्दुल्लाह-अब्दुल्लाह ने यह कहकर पुनर्मतदान से अपने आपको अलग कर लिया कि निष्पक्ष मतदान हो ही नहीं सकते.

अमरीका इन चुनावों पर नज़र लगाए हुए है क्योंकि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इन दिसंबर में अफ़ग़ानिस्तान में अपनी युद्धनीति पर पुनर्विचार करने वाले हैं. माना जा रहा है कि वे अगले साल से सेना की वापसी की योजना पर विचार करेंगे.

कड़ी सुरक्षा

इन चुनावों के ठीक एक दिन पहले दो उम्मीदवारों सहित 18 चुनाव कर्मचारियों और प्रचारकों का अपहरण कर लिया गया.

शनिवार के चुनावों के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.

पूरे देश में 2,80, 000 सैनिकों और पुलिस बल को तैनात किया गया है.

34 प्रांतों में कोई 6000 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं लेकिन माना जा रहा है कि इनमें से एक हज़ार केंद्र तो सुरक्षा कारणों से खुलेंगे ही नहीं.

मतदान भारतीय समयानुसार आठ बजे शुरु होगा और शाम पाँच बजे ख़त्म होगा.

पूरे अफ़ग़ानिस्तान में कोई एक करोड़ मतदाता दर्ज हैं लेकिन संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यदि 50 से 70 लाख लोग भी बाहर निकलकर वोट डालते हैं तो अच्छा है.

अफ़ग़ान पुलिस और सेना मतदान केंद्रों की देखभाल करेंगे और विदेशी सेना उनकी सहायता करेगी.

बेहतर भविष्य

हमलों और मतदान के दौरान हिंसा की थ़बरों के बावजूद कई इलाकों में लोग मतदान के लिए आगे आए.

सरकारी नौकरी पेशा मुहम्मद हुसमन कहते हैं, ''मैं यहां वोट डालने आया हूं क्योंकि मैं अफ़ग़ानिस्तान में अमन और स्थिरता चाहता हूं. हालांकि मैं मतदान के दौरान सुरक्षा इंतज़ामों को लेकर थोड़ा आशंकित हूं. उम्मीद है मेरा वोट उस व्यक्ति तक पहुंचेगा जिसे मैंने वोट दिया है. ''

हुसमन जैसे कई आम नागरिक जो मतदान के लिए खुलकर सामने आए ये मानते हैं कि उनका ये कदम अफ़ग़ानिस्तान को बेहतर भविष्य के रास्ते पर लेकर जाएगा.

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