रो पड़े करज़ई

हामिद करज़ई
Image caption करज़ई के संबोधन को सुन रहे शिक्षक, बच्चों और अधिकारियों में से कुछ लोग भी रो पड़े.

अफ़ग़ानिस्तान में बच्चों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई देश के बिगड़ते हालात पर रो पड़े.

काबुल में अपने इस संदेश के दौरान नम आंखों से करज़ई ने कहा कि उन्हें इस बात का डर है कि अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध जैसे हालात के चलते उनके बेटे को एक दिन ये देश छोड़ना न पड़ जाए.

संबोधन के दौरान करज़ई ने उस विशेष दल के सदस्यों के नामों की घोषणा भी की जो औपचारिक तौर पर तालीबान और चरमपंथियों से बातचीत की प्रक्रिया शुरु करेंगे.

सबसे बुरा दौर

2001 में अमरीका के हमले के बाद ये अफ़ग़ानिस्तान के लिए हिंसा का सबसे बुरा दौर है.

अपने भाषण के दौरान करज़ई ने शिक्षा को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया. अफ़ग़ानिस्तान में साक्षरता दर फ़िलहाल 30 फ़ीसदी है.

करज़ई ने कहा कि वो चाहते हैं कि अफ़ग़ानी शिक्षित हों और आत्मनिर्भर बनें और इसके साथ ही वो रो पड़े.

उन्होंने कहा, ''हमारे बच्चे स्कूल नहीं जा क्योंकि हर तरफ़ बम धमाकों और आत्मघाती हमलों का कहर है. शिक्षक स्कूलों से दूर हैं क्योंकि उन्हें अपनी मौत का ख़तरा है. स्कूल अधिकतर बंद रहते हैं.''

'सहम जाता हूं'

अपने तीन साल के बेटे का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''मैं चाहता हूं कि वो यहां स्कूल जाए. ईश्वर गवाह है कि मैं इन बातों को लेकर कितना चिंतित हूं. मैं ये सोच कर सहम जाता हूं कि मेरा बेटा मीरवाइज़ अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने को मजबूर हो जाए तो...''

टेलिविज़न पर दिखाया गया कि किस तरह करज़ई के इस संबोधन को सुन रहे हज़ारों शिक्षक, बच्चे और अधिकारियों में से कुछ लोग भी रो पड़े.

ग़ौरतलब है कि कुछ दिनों पहले अमरीकी पत्रकार बॉब वुडवर्ड ने अपनी एक किताब में खुफ़िया जानकारियों के हवाले से इस बात का ज़िक्र किया था कि राष्ट्रपति करज़ई अवसाद के शिकार हैं और उनका इलाज चल रहा है.

Image caption मंगलवार को एक आत्मघाती हमले में गज़नी प्रांत के उप राज्यपाल मोहम्मद काज़िम की मौत हो गई.

हालांकि राष्ट्रपति कार्यालय ने वुडवर्ड की किताब में किए गए दावों को ख़तरनाक बताया.

आत्मघाती हमले

इससे पहले मंगलवार को हुए एक आत्मघाती हमले में गज़नी प्रांत के उप राज्यपाल मोहम्मद काज़िम की मौत हो गई.

इस हमले में उनके बेटे और रक्षक सहित पांच लोगों की मौत हो गई थी.

अफ़ग़ानिस्तान में नेटो के कमांडर डेविड पेट्रियास का कहना है कि कई विद्रोहियों ने सरकार से संपर्क कर हथियार छोड़ने की पेशकश की है.

हालांकि बीबीसी संवाददाता का मानना है कि इन लोगों की संख्या फ़िलहाल बहुत कम है.

अफ़ग़ानिस्तान में फ़िलहाल नेटो के 1,50,000 से ज़्यादा सैनिक दस्ते मौजूद हैं.

अमरीका अगले साल इन सैनिकों की संख्या घटाने पर विचार कर रहा है.

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