कश्मीर में जनमतसंग्रह हो: पाकिस्तान

  • 29 सितंबर 2010
शाह महमूद क़ुरैशी
Image caption शाह महमूद क़ुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा जोरशोर से उठाया है

पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में भारत प्रशासित कश्मीर का मुद्दा एक बार फिर उठाया है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक अधिवेशन में भाषण के दौरान, कश्मीर विवाद को सुलझाने के लिए संयुक्त राष्ट्र से जनमत संग्रह कराए जाने की अपील दोहराई है. लेकिन भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के कश्मीर मुद्दे को उठाने पर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है.

भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से जारी कश्मीर विवाद को संयुक्त राष्ट्र में सबसे पुराने मुद्दों में से एक बताते हुए, पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा, '' जम्मू कश्मीर विवाद कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के बारे में है, जो संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में निष्पक्ष जनमत संग्रह के ज़रिए उन्हें दिया जाना चाहिए.''

क़ुरैशी ने कहा, '' पाकिस्तान भारत के कब्ज़े वाले कश्मीर में पिछले दो महीनों में सुरक्षा बलों के हाथों 100 से ज़्यादा कश्मीरियों के मारे जाने की भरपूर निंदा करता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील भी करता है कि भारत द्वारा कश्मीरियों के दमन पर रोक लगाई जाए.''

कश्मीरियों के साथ पाकिस्तान की हिमायत का यकीन दिलाते हुए क़ुरैशी ने कहा कि कश्मीरियों के मानवाधिकारों का आदर किया जाना चाहिए और उनकी आवाज़ सुनी जानी चाहिए जिससे ऐसा माहौल पैदा हो सके कि इस मसले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने में मदद मिले.

लेकिन कश्मीर मुद्दे पर भारत को आड़े हाथों लेने के साथ ही पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने के मकसद से समग्र वार्ता करना चाहता है, जिसमें कश्मीर समेत सभी द्विपक्षीय मुद्दे शामिल हों.

संयुक्त राष्ट्र में बोलते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कश्मीर मुद्दे का हल संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और कश्मीरियों की चाहत के अनुसार निकाले जाने की वकालत की.

भारत ने की आलोचना

लेकिन पाकिस्तान के कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर एक बार फिर उठाए जाने की भारत ने कड़ी आलोचना की है.

न्यूयॉर्क में ही मौजूद भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के भारतीय प्रशासित कश्मीर संबंधित बयान पर अफ़सोस जताते हुए कहा, '' संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी विदेश मंत्री के भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर से संबंधित बयान से मुझे बहुत अफ़सोस हुआ है. जम्मू कश्मीर के बारे में पाकिस्तान का यह बयान अस्वीकार्य है. पाकिस्तान में इस समय बहुत सी चुनौतियां हैं, और ऐसे में इस प्रकार के बयान देकर पाकिस्तान उन चुनौतियों से ध्यान नहीं हटा सकता है.''

दोनों देशों के विदेश मंत्री संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक अधिवेशन में भाग लेने के लिए आए हैं और अपने अपने दलों के साथ एक हफ़्ते से न्यूयॉर्क में ही डेरा डाले हैं. और दोनों के बीच गाहेबगाहे बयानबाज़ी भी होती रही है.

पाकिस्तानी खेमा कहता है कि हम भारत के साथ समग्र बातचीत करना चाहते हैं जिसमें कश्मीर भी शामिल होगा, वहीं भारतीय खेमे से पाकिस्तान को बराबर यह भी याद दिलाने की कोशिश रही है कि सीमा पार से चरमपंथ को रोकने के लिए ठोस क़दम उठाए बगैर पाकिस्तान के साथ समग्र वार्ता नहीं हो सकती.

लेकिन इस दौरान संयुक्त राष्ट्र के गलियारों और हालों में गुज़रते हुए दोनों विदेश मंत्रियों को एक दूसरे का हालचाल पूछने का कम से कम दो बार तो मौक़ा मिला है लेकिन दोनों ने किसी प्रकार की औपचारिक बातचीत नहीं की है.

और अब दोनों ओर से बयानबाज़ी में तेज़ी के बाद मुश्किल ही लगता है कि न्यूयॉर्क में रहते दोनों नेता कोई औपचारिक बैठक करेंगे.

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