लंदन में अफ़ग़ान फ़ैशन शो

अफ़ग़ान फ़ैशन शो
Image caption ज़्यादातर कपड़े अफ़ग़ानिस्तान से ही बनकर आए थे

आमतौर पर अफ़ग़ानिस्तान की नकारात्मक ख़बरें ही सुर्खियाँ बनाती हैं.

ख़ासकर ब्रिटेन में अगर आप पूछें कि वे अफ़ग़ानिस्तान को किस तरह से देखते हैं तो लोग या तो युद्ध का नाम लेंगे या आतंकवाद का या फिर नशीली दवाओं का.

लेकिन वह इस देश का एक पहलू भर है.

लंदन में एक महिला डिज़ाइनर ने कपड़ों के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश की है कि अफ़ग़ानिस्तान का एक समृद्ध परंपरा रही है और एक उज्जवल भविष्य सामने है.

ज़ुलैख़ा शेरज़ाद का कहना है कि उनके कपड़े यह दिखाने का प्रयास हैं कि अफ़ग़ानिस्तान युद्ध और बुरक़ा के अलावा भी कुछ है.

उनकी डिज़ाइनों में परंपरागत शैली और पश्चिमी फ़ैशन मूल्यों का मिश्रण दिखाई देता है.

भड़कीले रंगों में सिल्क के जैकेट हैं और महीन कशीदाकारी वाले कपड़े हैं.

इनमें से अधिकांश चीज़ें अफ़ग़ानिस्तान में ही बनी हुई हैं.

उम्मीद से भरी हैं ज़ुलैख़ा

Image caption ज़ुलैख़ा शेरज़ाद वास्तुविद रह चुकी हैं

ज़ुलैखा दस साल की थीं जब अफ़ग़ानिस्तान में रूस ने हमला किया और उन्होंने देश छोड़ दिया.

वे न्यूयॉर्क में वास्तुविद थीं और छह साल पहले उन्होंने इसे छोड़ने का फ़ैसला किया और अपना आधा समय काबुल में बिताने लगीं.

अब ज़ुलैख़ा की डिज़ाइनें लोकप्रिय होने लगी हैं.

हालांकि वे जानती हैं कि यदि सुरक्षा व्यवस्था और बिगड़ी तो उनका काम मुश्किल हो जाएगा.

लेकिन उन्हें उम्मीद है कि वे काबुल में लोगों को काम देती रहेंगीं और अफ़ग़ानिस्तान की परंपरागत शैली को जीवित रख सकेंगीं.

ब्रिटेन में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत हुमायूँ तंदर मानते हैं कि ज़ुलैख़ा का फ़ैशन शो एक ऐसे बड़े संघर्ष का हिस्सा है जिसमें कोशिश हो रही है कि अफ़ग़ानिस्तान को ख़ूनी युद्ध के नज़रिए से देखना बंद किया जाए.

ज़ुलैख़ा का शो एक चैरिटी कार्यक्रम का हिस्सा था.

और इस शो ने मीडिया को अफ़ग़ानिस्तान की ऐसी ख़बरें दीं जो आमतौर पर दिखाई नहीं देतीं.

संबंधित समाचार