ठेकेदार दे रहे हैं तालिबान को पैसे

निजी सुरक्षा गार्ड
Image caption निजी सुरक्षा गार्ड में से ज़्यादातर अमरीका की सेवा पर हैं

अमरीकी संसद की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी सुरक्षा पर अमरीका के निर्भरता की वजह से तालिबान की जेबें भर रही हैं.

संसद की सशस्त्र सेवा समिति के एक अध्ययन में कहा गया है कि इसकी वजह यह है कि निजी सुरक्षा एजेंसियों के ठेकेदार अक्सर स्थानीय लोगों के बारे में ठीक तरह से जाँच-पड़ताल नहीं कर पाते और अंत में वे क़बायली लड़ाकों को ही भर्ती कर लेते हैं.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भर्ती के समय ठीक तरह से जाँच-पड़ताल के लिए 'तुरंत और कड़े क़दम' उठाने को कहा गया है.

इस समय अफ़ग़ानिस्तान में क़रीब 26 हज़ार निजी सुरक्षा गार्ड कार्यरत हैं, जिनमें से ज़्यादातर अफ़ग़ान ही हैं.

दस निजी गार्डों में से नौ अमरीका के लिए काम करते हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में निजी सुरक्षा एजेंसियाँ राजनयिक ठिकानों, सहायता एजेंसियों और आपूर्ति दलों को सुरक्षा प्रदान करती हैं.

इससे पहले अमरीकी संसद की ही एक रिपोर्ट में कहा गया था कि ट्रेकों के ठेकेदार भी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तालिबान को पैसे देते हैं.

ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अफ़ग़ानिस्तान सरकार तालिबान से बातचीत कर रही है और उन्हें मुख्यधारा में लाने की बात कर रही है.

चेतावनी

अगस्त महीने में राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने निजी सुरक्षा एजेंसियों को चार महीनों का समय देते हुए कहा था कि वे अफ़ग़ानिस्तान में अपना कामकाज समेट लें.

समिति के प्रमुख डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद कार्ल लेविन ने कहा, "निजी सुरक्षा ठेकेदारों पर हमारी निर्भरता की वजह से क़बायली लड़ाकों और अफ़ग़ानिस्तान सरकार के नियंत्रण से बाहर सक्रिय सत्ता के दलालों को ही ताक़तवर बनाया है."

उन्होंने कहा, "ये ठेकेदार हमारे जवानों की सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं और इससे हमारे मिशन की सफलता भी ख़तरे में पड़ती है."

बीबीसी के वॉशिंगटन संवाददाता स्टीव किंगस्टोन का कहना है कि इस रिपोर्ट में जो तस्वीर पेश की गई है वह विचलित करने वाली है. इसमें बताया गया है कि जिन लोगों को भर्ती किया गया है, उनमें से कुछ को हथियार चलाने का बहुत कम अनुभव है जबकि कुछ ठेकेदारों के तालिबान से ज़ाहिर संबंध रहे हैं.

इस दस्तावेज़ में कई उदाहरण दिए गए हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि किस तरह एक व्यक्ति को अमरीकियों ने 'मिस्टर व्हाइट' का नाम दे दिया था जो हिंसक फ़िल्म 'रिज़रवॉयर डॉग्स' का कुख़्यात चरित्र है.

इस व्यक्ति के बारे में कहा जाता है कि उसने तालिबान को पैसे दिए और ऐसे वरिष्ठ कमांडरों की एक बैठक की मेज़बानी की, जो नैटो की फ़ौजों पर सड़क के किनारे हुए हमलों के लिए ज़िम्मेदार रहे हैं.

Image caption लोग पुलिस या सेना की जगह निजी सुरक्षा एजेंसियों में काम करना चाहते हैं

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन क़बायली लड़ाकों को धन मुहैया करवाकर अमरीका एक स्थिर अफ़ग़ानिस्तान बनाने के अपने लक्ष्य को ही कमज़ोर कर रहा है.

इसमें चेतावनी दी गई है कि निजी सुरक्षा एजेंसी की इस आकर्षक नौकरी ने अफ़ग़ान पुलिस और सेना में लोगों की दिलचस्पी को कम किया है जहाँ तनख़्वाह अपेक्षाकृत कम है.

यह रिपोर्ट जुलाई में आई संसद की उस रिपोर्ट की अगली कड़ी है, जिसमें कहा गया है कि ट्रकों के ठेकेदारों ने क़बायली लड़ाकों को हर साल लाखों डॉलर का भुगतान करते हैं जिससे कि सामान की आपूर्ति करने वाले ट्रकों को सुरक्षा मिल सके.

हाल के महीने में अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी फ़ौज ने यह तय किया है कि वह सुरक्षा ठेकेदारों पर निगाह रखेंगे और यह ध्यान रखेंगे कि जो पैसे ठेकेदारों को दिए जा रहे हैं वे नीचे के स्तर पर किस तरह से वितरित हो रहे हैं.

संबंधित समाचार