विहिप सुप्रीम कोर्ट जाएगी

  • 20 अक्तूबर 2010
इलाहाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले में विवादित स्थल को तीन हिस्सों में बाँटने को कहा गया है
Image caption इलाहाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले में विवादित स्थल को तीन हिस्सों में बाँटने को कहा गया है

विश्व हिंदू परिषद ने कहा है कि अयोध्या में सम्पूर्ण विवादित धार्मिक स्थल 'रामजन्म भूमि’ है और हाईकोर्ट के निर्णय के अनुसार उसका विभाजन स्वीकार नहीं किया जाएगा.

बुधवार को अयोध्या में परिषद की ‘संत उच्चाधिकार समिति’ की एक बैठक में तय हुआ कि विवादित स्थल और आसपास की समस्त सत्तर एकड़ ज़मीन हासिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के साथ ही एक प्रतिनिधि मंडल प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह से मुलाक़ात करेगा.

ये प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से अपनी यह मांग दोहराएगा कि संसद में क़ानून बनाकर यह समस्त भूमि एक विशाल मंदिर बनाने के लिए राम जन्म भूमि न्यास को सौंप दी जाए.

प्रस्ताव में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय के उस हिस्से का स्वागत किया गया जिसमें अदालत ने उस स्थान को राम की जन्म भूमि माना है जिस स्थान पर आज राम लला विराजमान हैं, लेकिन परिषद को हाईकोर्ट के निर्णय के उस हिस्से पर आपत्ति है जिसमें विवादित स्थल का लगभग पन्द्रह सौ वर्ग मीटर का एक तिहाई मुस्लिम समुदाय को और राम चबूतरा तथा आस पास का एक तिहाई हिस्सा रामानंदी वैरागी वैष्णव संतों के पंचायती ट्रस्ट निर्मोही अखाड़ा को देने की बात कही गई है.

विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि हिंदू क़ानून के अनुसार समस्त भूमि भगवान राम की है. इसके अलावा अदालत ने जन्म भूमि को अलग से एक देवता माना है और उसका विभाजन नही हो सकता.

अशोक सिंघल ने कहा कि हाईकोर्ट ने राम जन्म भूमि न्यास को भी क़ानूनी मान्यता दे दी है. न्यास ने ही प्रस्तावित मंदिर के लिए लगभग साठ करोड़ रुपए की लागत से पत्थर मंगाकर उन्हें तराशने का कम कराया है, इसलिए मंदिर तो वहीं बनाएगा.

लेकिन अशोक सिंघल ने साथ ही ये भी कहा कि मंदिर के प्रबंध में निर्मोही अखाड़ा का भी सहयोग लिया जाएगा.

विश्व हिंदू के प्रस्ताव में मुसलमानों से अपील की गई है कि वो अदालत से प्राप्त एक तिहाई हिस्से को स्वेच्छा से भगवान राम को सौंप दे.

और मस्जिद नहीं

प्रस्ताव में ये भी कहा गया है कि अयोध्या तीर्थ की सांस्कृतिक सीमा में किसी नई मस्जिद का निर्माण नहीं होगा.

विश्व हिंदू परिषद के इस रुख़ से साफ़ हो गया है कि लगभग साठ सालों से चला आ रहा ये विवाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद भी समाप्त नहीं होगा और मुक़दमा लड़ने वाले लगभग सभी गुट सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं.

साथ ही साथ विश्व हिंदू परिषद ने इस मामले में प्रधानमंत्री से मुलाक़ात करने और संसद में क़ानून बनाकर ज़मीन देने की मांग करके मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाए रखने की भी कोशिश की है, यद्यपि उसे मालूम है कि जब उसके समर्थन से बनी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने ऐसा नहीं किया तो कांग्रेस भला क्यों करेगी.

निर्मोही अखाड़ा के प्रवक्ता स्वामी राम दास ने आरोप लगाया कि विश्व हिंदू परिषद मामले का राजनीतिकरण कर रही है.

स्वामी राम दास ने कहा कि इनका अखाड़ा डेढ़ सौ साल से राम जन्म भूमि की लड़ाई लड़ रहा है और अखाड़ा भी समस्त भूमि पर अपना दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगा.

उधर मामले एक प्रमुख वादी हाशिम अंसारी ने कहा है कि मामले को बातचीत के ज़रिए हल करने की कोशिश जारी रखेंगे. हाशिम अंसारी ने कहा, "अगर विश्व हिंदू परिषद अपनी जगह से हटने को तैयार नहीं है तो हम भी अपनी जगह से हटने को तैयार नही हैं. उन्हें राजनीति का सहारा लेना है, हमको राजनीति का सहारा नहीं लेना. मस्जिद समेत वक्फ की साढ़े सात बीघा ज़मीन हम भी चाहते हैं. उनको मंदिर-मस्जिद की लड़ाई से राजनीतिक फ़ायदा लेना है. हमें नही."

हाशिम अंसारी ने कहा कि वो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और सुन्नी वक्फ बोर्ड से बंधे हैं मगर भाईचारे की मुहिम जारी रखेंगे. अगर वे सुप्रीम कोर्ट जाते हैं और हमारा नाम रखेंगे तो रखें लेकिन अगर नही रखेंगे तो भी उनका विरोध नही करेंगे और जो वो तय करेंगे उसे मानेंगे.

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