सेना समर्थक पार्टी ने जीत का दावा किया

बर्मा में सेना समर्थित यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डिवेल्पमेंट पार्टी ने कहा है कि उसने हाल ही में हुए चुनाव में 80 फ़ीसदी सीटें जीत ली हैं.

बर्मा में 20 साल बाद सात नवंबर को चुनाव हुआ है. 1990 में आख़िरी बार चुनाव हुआ था जब एनएलडी पार्टी की नेता आंग सांग सू ची जीती थीं लेकिन उन्हें सत्ता में आने नहीं दिया गया था.

लोकतंत्र समर्थक पार्टी एनएलडी ने इस बार चुनाव का बहिष्कार किया है और सू ची इस दल की नेता हैं. जबकि अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि धाँधली हुई है. ये स्पष्ट नहीं है कि आधिकारिक नतीजे कब घोषित किए जाएँगे.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा है कि चुनाव पूरी तरह से पारदर्शी नहीं है. हालांकि कुछ टीकाकारों का मानना है कि भले ही इस चुनाव में ख़ामियाँ हैं लेकिन यहाँ से लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुरुआत होगी क्योंकि अब विपक्ष के पास भी आवाज़ होगी, भले ही वो सीमित रहेगी.

वहीं अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं कहा जा सकता है.

छह पार्टियों ने चुनाव आयोग के पास शिकायत दर्ज की है.

इस बीच चुनाव के कारण जनजातीय कारेन विद्रोहियों और सुरक्षाबलों की बीच भड़की हिंसा के बाद करीब 15 हज़ार लोग थाईलैंड भाग गए हैं.

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बर्मा के सैनिकों ने अब विद्रोहियों को पीछे धकेल दिया है जिन्होंने चुनाव का विरोध करते हुए रविवार को सरकारी इमारतों को निशाना बनाया था.

डेमोक्रेटिक कारेन बुद्धिस्ट आर्मी ने एक पुलिस थाने और मतदान केंद्र पर कब्ज़ा कर लिया था.

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