जड़ी बूटियाँ निकालने पर रोक से लोग नाराज़

जम्मू कश्मीर में ऊंचे-ऊंचे पहाड़ प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं बल्कि प्राकृतिक संसाधनों से भी भरपूर हैं. यहाँ वो दुर्लभ जड़ी बूटियाँ हैं जिनसे कई बीमारियों के इलाज के लिए दवा बनाई जाती है.

सैंकडों लोगों का रोज़गार भी इन जड़ी बूटियों पर निर्भर था परंतु वर्ष 2005 में राज्य सरकार ने पहाड़ी जंगलों में से इनके निकालने पर यह कह कर प्रतिबंध लगा दिया था कि यह लुप्त हो रही हैं.

ऊंचे पहाड़ो पर रहने वाले लोग जंगलों से जड़ी बूटियाँ चुनते थे और एजेंटों को बेचते थे जो आगे दवा बनाने वाली कंपनियों को बेचते थे.

किश्तवार में इस व्यापार के साथ जुड़े संजय गुप्ता के परिवार ने वहां इन जड़ी बूटियों का शोधन करने के लिए एक इकाई लगाई थी.

इस पूरे व्यापार के साथ केवल डोडा और किश्तवार ज़िले में ही लगभग दस हज़ार लोगों का रोज़गार जुड़ा था जबकि पूरी रियासत में यह संख्या बीस हज़ार थी.

यह लोग औसतन तीन से चार सौ रुपये प्रतिदिन कमा लेते थे जिससे घर का गुज़ारा चलता रहता था .

फिर वर्ष 2005 में राज्य सरकार ने जंगलों से इन जड़ी बूटियों के निकालने पर पाबंदी लगा दी. इस प्रतिबंध के बाद जड़ी बूटियाँ चुनने वालों से लेकर शोध करने वाली इकाईयां सबका काम बंद हो गया.

पाबंदी हटाने की माँग

जम्मू विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान के डॉक्टर हरीश चंदर बताते हैं कि जम्मू कश्मीर के ऊंचे ऊंचे पहाड़ी जंगलों में दुर्लभ जड़ी बूटियाँ पैदा होती हैं जो गुणवत्ता में भी सबसे ऊपर हैं.

वे कहते हैं, "यूं तो यह जड़ी बूटियाँ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी पाई जाती हैं परंतु यहाँ की किसम सबसे बढ़िया है. उन दोनों राज्यों में इन जड़ी बूटियों को उगाया भी जाता है जिससे इन्हें प्राकृतिक परिस्थितियां नहीं मिलती. जम्मू कश्मीर में यह जड़ी बूटियाँ प्राकृतिक तौर पर ही पैदा हो रही है जो दुनिया में सबसे बढ़िया दर्जे की हैं."

जम्मू कश्मीर में पाए जाने वाली ये जड़ी बूटियाँ बुखार, पीलिया, पेट की बीमारियों, अल्सर , संक्रमण वगैरह के अतिरिक्त केंसर की दवा में इस्तेमाल होती हैं.

जम्मू कश्मीर में प्रतिबंध लगने से पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह व्यापार पनप रहा है. लेकिन वहां पर दवा बनाने वाली कंपनियों को जड़ी बूटियों में वो गुणवत्ता नहीं मिली जो जम्मू कश्मीर में थी. इस कारण इन का चीन से आयात शुरू हो गया.

जम्मू कश्मीर में लोगों का कहना है कि अगर बाकि राज्यों में प्रतिबंध नहीं है तो यहाँ क्यों.

इसके उत्तर में राज्य के वन मंत्री मानते हैं कि लोगों को इन जड़ी बूटियों को निकालने की इजाज़त मिलनी चाहिए.

उनका कहना है कि इसस कोई बुरा प्रभाव पड़ने वाला नहीं है और जल्द ही लोगों के हक़ में यह फैसला लिया जाएगा.

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