'गिरफ़्तारी के बाद भी लखवी, सईद चला रहे हैं लश्कर'

मुंबई
Image caption पाकिस्तान में मुंबई हमलों का मुकदमा चल रहा है जिसमें लखवी अभियुक्त हैं.

वेबसाइट विकीलीक्स पर जारी ख़ुफ़िया अमरीकी कूटनीतिक दस्तावेज़ों में अमरीकी अधिकारियों के एक आकलन में कहा गया है कि 'नवंबर 2008 में मुंबई हमलों में कथित भूमिका के लिए गिरफ़्तार किए जाने के बाद भी लश्करे तैबा के नेता हाफ़िज़ मोहम्मद सईद और लश्कर के सैन्य कमांडर ज़की-उर-रहमान लखवी अपने संगठन का संचालन कर रहे हैं.'

दस अगस्त 2009 के इस कूटनीतिक संदेश में इस विषय का विस्तृत वर्णन है. ग़ौरतलब है कि लश्कर के सैन्य कमांडर ज़की-उर-रहमान लखवी को दिसंबर 2008 को पाकिस्तान में गिरफ़्तार किया गया था और वे मुंबई हमलों के सिलसिले में पाकिस्तान में चल रहे मुकदमे में अभियुक्त हैं.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के एक गुप्त दस्तावेज़ के हवाले से बताया गया है कि विश्व में सुन्नी चरमपंथी संगठनों को सऊदी अरब से सबसे अधिक पैसा मिलता है और इनमें अल क़ायदा, तालेबान, लश्करे तैबा, हमास शामिल हैं.

'चीन की प्रतिबंध पर आपत्ति'

इस गुप्त संदेश में कहा गया है कि जुलाई 2009 के मध्य तक लखवी लश्कर के सैन्य ऑपरेशन्स के हर साल के 36.5 करोड़ पाकिस्तानी रुपयों के बजट के मुखिया थे. रिपोर्टों में एक सूत्र जिसका इन नेताओं से सीधा संपर्क है, उसके हवाले से कहा गया है उन्होंने इस पैसे से हथियार और असले को छोड़ सभी ज़रूरत की चीज़े ख़रीदीं.

विकीलीक्स द्वारा सार्वजनिक किए इस संदेश के मुताबिक, "अमरीकी अधिकारियों का मानना है कि इन दोनों नेताओं ने मुंबई हमलों समेत दक्षिण एशिया में लश्कर के कई हमलों की योजना बनाई और इनका संचालन किया. जमात-उद-दावा के नाम पर राहत कार्यों के लिए एकत्र पैसे में से कुछ पैसे तो ज़रूरी लश्कर के आतंकवादी अभियानों के लिए इस्तेमाल हुए."

महत्वपूर्ण है कि अमरीकी राजनयिकों के कूटनीतिक दस्तावेज़ में कहा है कि मुंबई हमलों से पहले अमरीका के जमात-उद-दावा और सईद को प्रतिबंधित संगठन-व्यक्तियों की सूची में डालने का अनुरोध चीन की आपत्ति के कारण टाल दिया गया जो उसने पाकिस्तान का पक्ष रहते हुए किया था.

पाक पहुँच रहे पैसे को रोकें: हिलेरी

दिसंबर 2009 में अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के एक गुप्त दस्तावेज़ में अमरीकी राजनयिकों को निर्देश दिया गया है कि वे 'खाड़ी से पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में उग्रवादियों को पहुँच रहे पैसे को रोकने के प्रयासों को बढ़ाएँ.'

इस गुप्त दस्तावेज़ में अमरीकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि लश्करे तैबा और जमात-उद-दावा एक ही संगठन मरकज़-उद-दवावल इर्शाद से पनपे हैं.

इन दस्तेवेज़ों में बताया गया है - "जब 2002 में जब लश्कर को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया तो मरक़ज ने उससे सार्वजनिक तौर पर नाता तोड़ लिया और ख़ुद को जमात-उद-दावा का नाम दिया और लश्कर से अधिकतर फंड और संपत्ति जमात-उद-दावा के नियंत्रण में चली गई...लश्कर के पुराने दफ़्तरों के दरवाज़ों पर केवल नाम को बदल दिया गया..हम जानते हैं कि दोनों संगठनों में हाफ़िज सईद समेत कई वरिष्ठ नेता वही हैं, लश्कर जिनके कब्ज़े में है और जो उसके सदस्यों को निर्देश देते हैं."

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