कौन था ओसामा का संदेशवाहक?

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Image caption ऐबटाबाद में उस घर के बाहर जमा स्थानीय लोग जहाँ लादेन को मारा गया

ऐबटाबाद में अमरीकियों को ओसामा बिन लादेन तक पहुँचानेवाला शख्स कौन था?

अमरीकी अधिकारियों के अनुसार ये आदमी था – अबू अहमद अल कुवैती – कुवैत में जन्मा पाकिस्तानी, जो कि लादेन का सबसे ख़ास संदेशवाहक था.

उनका कहना है कि वे 2002 से ही उसपर निगाह रखे हुए थे और उसने लादेन के छिपने के ठिकाने के पास ही अपना घर बनाया हुआ था.

उन्होंने कहा कि कुवैती दो मई को हुए हमले में लादेन के साथ ही मारा गया.

वैसे ऐबटाबाद के हाशिम कॉलोनी में उसके पड़ोसी बताते हैं कि उसके घर के मालिक का नाम अरशद ख़ान था. वो एक चालीस की उम्र के आस-पास का लंबा-तगड़ा आदमी था.

हमले के बाद से उसे किसी ने नहीं देखा.

ज़ाली पहचान पत्र?

अरशद ख़ान ने अपने घर में गैस और बिजली के कनेक्शन के लिए सात साल पहले जो राष्ट्रीय पहचान पत्र जमा किए थे उनमें उसने ख़ुद को पश्चिमोत्तर पाकिस्तान के चारसदा ज़िले में स्थित कुरूना गाँव का निवासी बताया था.

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Image caption पड़ोसियों का कहना है कि लोग विनम्र थे मगर बहुत कम बात किया करते थे

उस गाँव में कोई भी उसे या पहचान पत्र में पिता के तौर पर दर्ज नक़ाब ख़ान को नहीं जानता.

एक स्थानीय निवासी और राजनीतिक कार्यकर्ता मुफ़्ती इफ़्तिख़ार ने बताया, अगर उसका परिवार यहाँ से होता तो सबको पता होता.

अरशद ख़ान से शायद इसी ज़ाली पहचान पत्र के आधार पर 2004 में ऐबटाबाद में घर बनाने के लिए ज़मीन ख़रीदी थी.

ये एक विडंबना ही है कि ये ज़मीन छावनी क्षेत्र में है जिसकी देखभाल सेना के हाथ में है और जो प्रतिष्ठित पाकिस्तान सैन्य अकादमी से महज़ एक किलोमीटर के फ़ासले पर है.

ऐबटाबाद छावनी बोर्ड के एक अधिकारी ने बीबीसी से इस बात की पुष्टि की है कि ये ज़मीन चारसदा गाँव के निवासी नक़ाब ख़ान के बेटे अरशद ख़ान के नाम पर ख़रीदी गई थी.

अधिकारी ने कहा कि वो इसके बारे में और जानकारी नहीं दे सकता क्योंकि इससे संबंधित सारे दस्तावेज़ पाकिस्तान के ख़ुफ़िया अधिकारी ले गए हैं.

नागरिकों के पहचान के आँकड़े रखनेवाले – नेशनल डेटा रजिस्ट्रेशन ऑथोरिटि – ने अभी तक इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है कि अरशद ख़ान के नाम का पहचान पत्र कब और किसने जारी किया.

ख़तरनाक घर

अरशद ख़ान और उसके संबंधियों ने अपने पड़ोसियों के सामने ये जता दिया था कि वे बहुत मिलनसार लोग नहीं हैं. लोगों को उनके बारे में बहुत कम जानकारी है.

पड़ोसियों का कहना है कि उस घर में तारिक़ ख़ान नाम का एक और व्यक्ति रहता था.मगर इस बारे में उनके बीच भ्रम है कि वे अपने भाई थे या चचेरे-ममेरे भाई.

उनके काम-धंधे को लेकर भी अलग-अलग बातें कही जा रही हैं. कुछ कहते हैं कि वे विदेशी मुद्रा का कारोबार करते थे तो कुछ उन्हें गाड़ियों के कलपुर्जों का स्मगलर. कुछ ये भी कहते हैं कि वे ट्रांसपोर्ट कंपनी चलाते थे. किसी को नहीं पता कि शहर में उनका कोई दफ़्तर था कि नहीं.

पड़ोसी कहते हैं कि वे लोग बहुत ही विनम्र थे लेकिन बेहद एकांतप्रिय. वे पास से गुज़रने पर दुआ-सलाम करते थे लेकिन कोई बातचीत करने से बचते थे.

इलाक़े की मस्जिद में अक्सर उनसे मिलनेवाले एक पड़ोसी ने कहा कि उसे उनके व्यक्तिगत बातें पूछते डर लगता था. एक पड़ोसी ने कहा कि 2007 में उस इलाक़े में आने के बाद से ही उसे ऐसा लगता था कि ख़ान का घर एक ख़तरनाक जगह है.

उसने कहा,"कई बार मैंने बुलेट प्रूफ़ सी लगनेवाली गाड़ियों को उसके घर जाते देखा. मैंने कभी भी उनके घर के मुख्यद्वार को गाड़ियों के भीतर जाने के अतिरिक्त एक सेकेंड भी और देर तक ख़ुला नहीं देखा."

कई पड़ोसियों ने बताया कि उन्होंने कभी-कभार उनकी दो पुरानी गाड़ियों में से एक में औरतों और बच्चों को बैठकर जाते हुए देखा. मगर औरतें कभी भी किसी और के घर में नहीं गईं.

कभी-कभी कुछ बच्चे बाहर आकर दूसरे बच्चों के साथ खेलते थे या दूकानों में जाकर मिठाई आदि ख़रीदते थे, लेकिन वे बहुत कम समय के लिए बाहर आते थे और दो में से एक भाई उनकी निगरानी करता रहता था.

संदेह और पुष्टि

अब इस बात को लेकर संदेह जताया जा रहा है कि अरशद ख़ान क्या सचमुच कुवैत में जन्मा पाकिस्तानी था जिसके पीछे अमरीकी 2002 से लगे थे.

लादेन को पकड़ने के लिए अमरीकियों के लिए ये जानना ज़रूरी था कि उसका संदेशवाहक कौन है.

2004 में इराक़ में पकड़े गए अल क़ायदा के एक सदस्य से अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए को कुवैती के बारे में पता चला.

मगर चूँकि बताया जाता है कि लादेन ने मोबाइल फ़ोन और इंटरनेट का इस्तेमाल बंद कर दिया था इसलिए सीआईए के लिए खोज मुश्किल हो गई.

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि अंततः अगस्त 2010 में उन्होंने कुवैती और एक और ऐसे अल क़ायदा सदस्य की टेलिफ़ोन पर बातचीत को पकड़ा जिसप नज़र रखी जा रही थी.

इस सूत्र का सहारा लेकर वे ऐबटाबाद में लादेन के ठिकाने तक पहुँचे.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इस सप्ताह हमले में मारे गए जिन लोगों की तस्वीरें जारी की हैं उनमें से एक का हुलिया अरशद ख़ान से मिलता है हालाँकि उनके पड़ोसियों ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है.

फ़िलहाल वो कौन था ये केवल लादेन की घायल पत्नी बता सकती है या कुछ बच्चे जो कि हमले में जीवित बच सके थे.

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