अफ़गा़निस्तान में सात नेटो सैनिकों की मौत

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Image caption पिछले एक साल में नेटो सेनाओं पर हमले तेज़ हुए हैं.

दक्षिणी अफ़गा़निस्तान में सड़क किनारे हुए दो बम धमाकों में सात नेटो सैनिक मारे गए हैं.

अफ़गा़निस्तान में तैनात अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता फ़ोर्स यानी आईएसएफ़ ने इन धमाकों की पुष्टि की है.

हालांकि अभी इस बात की जानकारी नहीं दी गई है कि मरने वाले सैनिक किस देश के नागरिक थे.

अफ़गा़निस्तान में तैनात विदेशी सुरक्षा बलों पर पिछले एक महीने के दौरान ये सबसे घातक हमला बताया जा रहा है.

इससे पहले नेटो का एक हेलीकॉप्टर पूर्वी अफ़गानिस्तान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमे एक सैनिक की मौत हो गई थी.

गौ़रतलब है कि अफगा़निस्तान में पिछले एक साल के दौरान क़रीब 200 विदेशी सैनिकों की मौत हो चुकी है.

विवादित दावा

उधर उत्तर-पूर्वी अफ़गा़निस्तान के स्थानीय नेताओं का कहना है कि गुरूवार को हुए नेटो हवाई हमले में कम से कम 20 लोग मारे गए हैं.

मरने वालों में आम नागरिक और अफ़गा़न सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. हालांकि नेटो ने इस दावे का खंडन किया है.

इस बीच नेटो के नेतृत्व वाली सेना का कहना है कि पूर्वी अफ़गा़निस्तान के नूरिस्तान इलाके में उनकी सेनाओं ने तालेबान लड़ाकों को पीछे धकेल दिया है.

इससे पहले स्थानीय अधिकारियों ने कहा था कि क़रीब 500 घुसपैठियों ने बुधवार को दोआब जि़ले पर अपना कब्ज़ा जमा लिया था.

हालांकि अफ़गा़निस्तान में तैनात अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मिशन ने स्थानीय नेताओं के इस दावे को नाकार दिया था.

आईएसएफ़ के प्रवक्ता मेजर टिम जेम्स ने कहा, "इलाके के ज़िला कार्यालय पर कभी भी कब्ज़ा नहीं हुआ. हालात कभी भी तालेबान के पक्ष में नहीं थे."

मेजर जेम्स के मुताबिक़ अफ़गा़न और नेटो सेना ज़िले में बुधवार शाम तक पहुँच चुकी थीं और उन्होंने कई हवाई हमले भी किए.

हालांकि क़ाबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ तालेबान के लिए उस पहाड़ी इलाके में छुपने के कई ठिकाने हो सकते हैं.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ नूरिस्तान के स्थानीय अधिकारी पिछले एक साल से चेतावनी दे रहे हैं कि नेटो और अफ़गा़न सेनाओं को इस इलाके में अपनी गतिविधियाँ बढानी चाहिए.

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