सूखे कछुओं का ज़ख़ीरा बरामद

कछुआ
Image caption कछुए का माँस भी खाया जाता है और दवाइयों में भी इसका इस्तेमाल होता है

बांग्लादेश में अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने भारत के साथ मिलने वाले सीमावर्ती क्षेत्र में तस्करों से 120 किलो सूखे कछुए बरामद किए हैं.

हालाँकि अधिकारियों ने ये भी कहा है कि दिनाजपुर ज़िले में हुई इस घटना में शामिल तस्कर भागने में कामयाब हो गए. हालांकि बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश यानि बीजीबी ने उनका पीछा कर उन्हें धरने की कोशिश की.

बीजीबी के लैफ्टिनेंट कर्नल अमीरुल इस्लाम ने बीबीसी को बताया, “ये सूखे कछुए भारत से बांग्लादेश में तस्कर किए जा रहे थे. अभी तक इस इलाक़े में ये सबसे बड़ी बरामदगी है.”

सूखे कछुओं का सूप बनाया जा सकता है और कुछ दवाइयों में भी इनका इस्तेमाल होता है.

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में एक किलोग्राम सूखे कछुए की क़ीमत लगभग 140 डॉलर होती है.

अधिकारियों ने कहा है कि हाल के महीनों में बांग्लादेश में सूखे कछुए और जीवित जानवरों की तस्करी में इज़ाफ़ा हुआ है.

वन्य जीव के व्यापार पर नज़र रखने वाली संस्था ट्रैफ़िक के एक प्रवक्ता, रिचर्ड थॉमस का कहना था, “मैं इतनी बड़ी बरामदगी को लेकर बहुत आश्चर्यचकित हूँ. इससे ये भी सवाल खड़ा होता है कि इस तरह के कितने बैग तो बिना पता चले ही गुज़र गए होंगे.”

रिचर्ड थॉमस ने कहा कि अगर इस घटना का विश्लेषण किया जाए तो समझा जा सकता है कि पूर्वोत्तर भारत से इस तरह के सूखे कछुए पूर्वी एशियाई देशों में पहुँचाए जाते रहे होंगे जहाँ देसी दवाइयों में इनका इस्तेमाल होता है.

'तस्करी का अड्डा'

ट्रैफ़िक संस्था का कहना है कि पूर्वी एशिया में माँस खाने और दवाइयों में इस्तेमाल करने के लिए कछुओं की भारी माँग है इसलिए उनकी पैदावार बड़े पैमाने पर की जा रही है.

जून के आरंभ में बैंकाक में कस्टम अधिकारियों को अलग-अलग क़िस्मों के सैकड़ों कछुए सूटकेस में मिले थे जो बांग्लादेश से विमान के ज़रिए वहाँ लाए गए थे.

Image caption पूर्वी एशियाई देशों में कछुओं की बड़ी माँग है

हाल के महीनों में बांग्लादेशी अधिकारियों ने बहुत से लोगों से ऐसे वन्य जीवों को बरामद किया है जिन्हें ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से पास रखा गया था.

बांग्लादेश के वन्य विभाग में जंगल संरक्षक तपन कुमार डे ने बीबीसी से कहा कि इस क्षेत्र से वन्य जीवों की तस्करी के लिए बांग्लादेश एक अड्डा बनता जा रहा है.

तपन कुमार का कहना था कि तस्कर आमतौर पर भारत के साथ मिलने वाले बांग्लादेश के विशाल सीमावर्ती इलाक़े का इस्तेमाल करते हैं. “पहले इन जीवों को बांग्लादेश लाया जाता है और वहाँ से पूर्वी एशिया के देशों में स्मगल कर दिया जाता है.”

पर्यावरण के लिए काम करनेवाली संस्थाओं का कहना है कि अगर वन्य जीवों की इस तस्करी पर रोक नहीं लगाई जाती है तो इससे भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों में वन्य संरक्षण के प्रयासों को बड़ा नुक़सान पहुँच सकता है.

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