बांग्लादेशः अंतरिम सरकार से जुड़े सवाल

Image caption बांग्लादेश की संसद में मतदान के दौरान विपक्ष ने बहिष्कार किया

बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के अधीन आम चुनाव कराए जाने के सांविधानिक प्रावधान को सत्ताधारी अवामी लीग ने विपक्ष के विरोध के बावजूद रद्द कर दिया है. इस मामले से जुड़े कुछ ज़रूरी सवालों के जवाब--

क्या है अंतरिम सरकार के अधीन चुनाव का प्रावधान?

बांग्लादेश में 1991 में जनरल इरशाद को सत्ता से हटाए जाने के बाद चुनाव किस तरह कराए जाएँ इस पर विवाद हुआ. समझौते के तौर पर बांग्लादेश के मुख्य न्यायाधीश को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाया गया और आम चुनाव कराए गए. लेकिन यह सांविधानिक प्रावधान नहीं बना. अवामी लीग ने माँग उठाई कि इसे एक सांविधानिक प्रावधान बना दिया जाना चाहिए ताकि देश में चुनाव हमेशा निष्पक्ष अंतरिम सरकार के नेतृत्व में ही हो. 1996 में बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) के कार्यकाल में इसे सांविधानिक प्रावधान बना दिया गया. इस प्रावधान के तहत ही 1998 और 2001 के आम चुनाव आयोजित हुए.

अवामी लीग की सरकार ने इस प्रावधान को क्यों रद्द कर दिया?

पिछले दिनों बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया था कि अंतरिम सरकार का प्रावधान संविधान की लोकतांत्रिक भावना के प्रतिकूल है, कोर्ट ने कहा था कि देश में बिना चुनी हुई सरकार नहीं रहनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अवामी लीग ने संविधान संशोधन प्रस्ताव लाकर विपक्ष की ग़ैर-मौजूदगी में प्रावधान को रद्द कर दिया क्योंकि अवामी लीग को दो-तिहाई बहुमत हासिल है. अवामी लीग का कहना है कि देश में चुनाव आयोग को अधिक शक्तिशाली बनाया जाएगा जो निष्पक्ष चुनाव कराएगा लेकिन विपक्ष का कहना है कि सत्ताधारी पार्टी को चुनाव में धांधली का मौक़ा मिल जाएगा.

इस विवाद की जड़ में क्या है?

देश की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियाँ, अवामी लीग और बीएनपी एक-दूसरे पर बिल्कुल विश्वास नहीं करतीं और उनका टकराव लगातार चलता रहता है. अंतरिम सरकार के अधीन चुनाव कराने के सवाल पर भी दोनों पार्टियों का रुख़ बदलता रहा है. विडंबना ही है कि जिस अवामी लीग ने इस प्रावधान को संविधानिक दर्जा दिलाया उसी ने इसे अब रद्द कर दिया है. इस प्रावधान को लेकर गहरे सवाल 2006 में उठे जब दोनों प्रमुख दलों के बीच इस बात पर विवाद छिड़ गया कि अंतरिम सरकार का प्रमुख कौन हो, बांग्लादेश की सेना मामले में कूद पड़ी, सेना समर्थित एक अंतरिम सरकार ने दो साल तक बांग्लादेश में शासन चलाया जिसके बाद 2008 में आम चुनाव हो पाए.

इस मामले में आगे क्या होगा?

विपक्ष ने इसे प्रमुख मुद्दा बनाने की घोषणा पहले ही कर दी है, बीएनपी का कहना है कि वह इस मामले पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाएगी. उसका कहना है कि अंतरिम सरकार की जगह सत्ताधारी पार्टी के बने रहने की वजह से चुनावों की निष्पक्षता संभव नहीं होगी. दोनों पार्टियों के बीच टकराव के सड़क पर आने के आसार दिख रहे हैं जो अगले चुनाव तक गंभीर रूप ले सकता है.

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