ग्रीस छोड़ रहे हैं दक्षिण एशियाई

  • 30 जून 2011
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Image caption ग्रीस में संसद के बाहर सरकार की कटौतियों के प्रस्ताव में विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी

आर्थिक संकट से जूझ रहे देश ग्रीस से हाल के समय में भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों के हज़ारों आप्रवासी बाहर निकल गए हैं.

दक्षिण एशियाई समुदायों के प्रतिनिधियों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियाँ चली गई हैं और उनके काम-धंधों पर असर पड़ रहा है.

एथेंस में भारतीय समुदाय की एक संस्था के नेता ने बताया कि 2008 में ग्रीस में आर्थिक संकट शुरू होने के बाद से बहुत सारे भारतीय मज़दूर देश वापस लौट गए हैं.

वहाँ बांग्लादेश के एक दूकानदार ने बताया कि बिक्री घटने के कारण उसे अपने आठ में से छह मज़दूरों की छँटनी करनी पड़ी.

भारी कर्ज़ में डूबे ग्रीस को दीवालिया होने से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता चाहिए और इसके लिए ग्रीस से अपने देश में ख़र्चे घटाने और टैक्स बढ़ाने के लिए कहा जा रहा है.

ग्रीस में कटौती प्रस्तावों का भारी विरोध हो रहा है और पिछले दिनों हड़ताल के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक संघर्ष हुए हैं.

भारतीय

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ग्रीस में जहाज़ों से होनेवाले कारोबार में व्यवसायी और वहाँ भारतीय समुदाय के संगठन के अध्यक्ष मधुर गांधी ने बीबीसी को बताया कि ग्रीस में लगभग 30,000 भारतीय रहते हैं.

बीबीसी हिंदी से बात करते हुए उन्होंने बताया कि इनमे से अधिकतर भारतीय अलग-अलग द्वीपों पर खेती करते हैं और एथेंस में भारतीयों की आबादी मात्र दो-तीन सौ है.

उन्होंने बताया कि अधिकतर भारतीय मज़दूर पंजाब से आए हैं और भारतीयों ने कोई 15 वर्ष पहले वहाँ जाना शुरू किया.

वे बताते हैं,"हाल के समय में बहुत सारे कारखाने और दूकानें बंद हुईं और हमारे लोगों की नौकरियाँ चली गईं."

"खेती करनेवाले भारतीयों पर भी असर पड़ा मगर सबसे अधिक प्रभाव भवन निर्माण क्षेत्र में काम करनेवालों पर पड़ा. अभी तक लगभग 1000-2000 भारतीय वापस लौट चुके हैं."

मधुर गांधी ने ये भी बताया कि ग्रीस में रह रहे 30,000 भारतीयों में से मात्र 18,000 भारतीय वैध आप्रवासी हैं.

अन्य लोगों ने या तो शरणार्थी बनने के लिए आवेदन किया हुआ है या वे अवैध तौर पर वहाँ रह रहे हैं.

सुनिएः ग्रीस में भारतीयों की स्थिति के बारे में बातचीत

दक्षिण एशियाई

एथेंस में बांग्लादेशी लोगों के संगठन के अध्यक्ष और व्यवसायी जैनल आबदीन ने कहा कि ग्रीस में बांग्लादेशी मूल के को 30,000 लोग हैं.

उन्होंने बताया कि वित्तीय संकट के कारण लोगों की नौकरियाँ जा रही हैं और उनके कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.

जैनल आबदीन ने बीबीसी की बांग्ला सेवा से कहा,"बहुत सारे बांग्लादेशी ग्रीस छोड़कर जा रहे हैं क्योंकि उनके पास कोई काम नहीं है."

उन्होंने बताया कि उनकी किराने-सब्ज़ी की दूकान रोज़ाना छह से सात हज़ार यूरो का कारोबार किया करती थी मगर वो अब घटकर तीन-चार सौ यूरो पर आ गया है और आपूर्ति देनेवाले उनके चेक स्वीकार नहीं कर रहे.

बांग्लादेशी दूतावास ने कहा कि देश लौटने में मदद के लिए हर महीने बहुत सारे लोग उनसे संपर्क कर रहे हैं.

वहीं पाकिस्तानी समुदाय के नेताओं ने भी बीबीसी उर्दू सेवा को बताया कि ग्रीस में पाकिस्तानी मूल के लोगों की संख्या लगभग 80,000 है जिनमें से मात्र 17,000 वैध आप्रवासी हैं.

पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने बताया कि ग्रीस में 75 प्रतिशत पाकिस्तानी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से वित्तीय संकट से प्रभावित हुए हैं.

उनके अनुसार अभी तक लगभग 1500 पाकिस्तानी ग्रीस से लौट चुके हैं.

श्रीलंका के भी कोई लगभग 5000-6000 लोग ग्रीस में रह रहे हैं.

एथेंस में एक बौद्ध भिक्षु मताले धम्मकांड ने बीबीसी की सिंहला सेवा को बताया कि अधिकतर श्रीलंकाई लोग वहाँ घरों या होटलों में नौकरी करते हैं.

उन्होंने बताया कि बहुत सारे लोग वहाँ अवैध तौर पर आए हैं और कई अब दूसरे देशों में जाना चाह रहे हैं.

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