चिनूक दुर्घटना का और ब्यौरा

  • 9 अगस्त 2011
चिनूक हेलिकॉप्टर
Image caption अमरीकी हेलिकॉप्टर चिनूक की इस दुर्घटना में 38 सैनिक मारे गए थे

अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी हेलिकॉप्टर चिनूक की शनिवार को हुई दुर्घटना के बारे में और ब्यौरा सामने आया है. इस दुर्घटना में 38 सैनिक मारे गए थे जिनमें 30 अमरीकी थे.

काबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता क्वेंटिन समरविल के अनुसार अमरीका और उसके सहयोगी देशों के सैनिक वारदक प्रांत की तांगी घाटी में एक तालेबान नेता को खोज रहे थे.

एके 47 राइफ़लों और बमों से लैस विद्रोहियों के साथ वो तालेबान नेता उन सैनिकों से उलझ गया. इन हालात में अमरीकी सेना ने और सैनिकों की मदद माँगी.

विशेष सैन्य बल के सैनिकों के साथ एक चिनूक हेलिकॉप्टर उनकी मदद के लिए भेजा गया मगर वो वहाँ पहुँचने से पहले ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उस पर सवार सभी सैनिक मारे गए.

उसके बाद तालेबान नेता के साथ उलझे अमरीकी और उसके सहयोगी देशों के सैनिकों ने दुर्घटनास्थल का रुख़ किया जिससे अगर वहाँ कोई बचा हो तो उसे राहत पहुँचाई जा सके.

तालेबान का दावा

इधर तालेबान का कहना है कि उसने हेलिकॉप्टर को निशाना बनाया मगर अफ़ग़ानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सेना की ओर से कहा गया है कि दुर्घटना की वजह का अभी तक पता नहीं चला है.

मामले की जाँच जारी है. इस बीच अंतरराष्ट्रीय सेना ने उस हेलिकॉप्टर पर मौजूद लोगों के बारे में और जानकारी दी है. उस पर चालक दल के पाँच सदस्य थे जबकि विशेष सैन्य दल के सदस्यों की संख्या 25 थी.

माना जा रहा है कि इस संख्या में अमरीका के विशेष 'नेवी सील्स' के जवान भी शामिल हैं.

इस दुर्घटना में अफ़ग़ानिस्तान के सात विशेष कमांडो और एक अफ़ग़ान दुभाषिया भी मारा गया.

अमरीकी सैनिकों के शव काबुल के बाहर बगराम हवाई अड्डे से वापस अमरीका ले जाए जाएँगे.

अफ़ग़ान विशेष सैन्य दल के सदस्यों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय सेना के जवानों की ऐसी कार्रवाई आम बात है और हर हफ़्ते ऐसी दर्जनों कार्रवाइयाँ होती हैं.

तालेबान के विरुद्ध संघर्ष में ये एक अहम हिस्सा है. वैसे इस तरह के विवादास्पद हमले अक़सर रात के अँधेरे में होते हैं मगर ख़ुद अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई कई मौक़ों पर आम लोगों की मौत के लिए ऐसी कार्रवाई को ज़िम्मेदार ठहरा चुके हैं.

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