अफ़गानिस्तान में विवादित आदेश

Image caption राष्ट्रपति हामिद करज़ई के आदेश से स्पष्ट है कि वो सत्ता पर पकड़ बनाए रखना चाहते हैं.

अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने एक आदेश जारी किया है कि देश की अदालतों को पिछले साल के संसदीय चुनावों के विवादित परिणामों पर कोई फ़ैसला देने का अधिकार नहीं है.

इन संसदीय चुनावों के परिणाम विवादास्पद रहे थे जिसमें करज़ई की जीत हुई थी.

राष्ट्रपति ने आदेश के ज़रिए अफ़गानिस्तान के विशेष चुनाव प्राधिकरण को भी भंग कर दिया है जिसने 62 सांसदों पर धांधली के ज़रिए अपनी सीटें जीतने का आरोप लगाया था.

हालांकि पूर्व में सरकार ने विशेष प्राधिकरण का समर्थन किया था लेकिन अब कहा गया है कि इसमें अब यह अवैध और असंवैधानिक हो गया है.

आदेश में कहा गया है कि स्वतंत्र चुनाव आयोग ही अब संसदीय चुनावों के परिणामों पर आखिरी फैसला ले सकेगा.

संसद को लेकर अफ़गानिस्तान में कई महीनों से भ्रम की स्थिति है और राष्ट्रपति अपने आदेश के ज़रिए इस स्थिति को दूर करना चाह रहे हैं.

प्रेक्षकों का कहना है कि बुधवार को दिए गए इस शासनादेश से अफ़गानिस्तान की संसद को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लग सकेगा.

काबुल में बीबीसी संवाददाता बिलाल सरवरी का कहना है कि करज़ई के इस आदेश से चुनावों को लेकर चल रहा विवाद कतई समाप्त नहीं होगा बल्कि यह विवाद अब स्वतंत्र चुनाव आयोग और सांसदों के बीच होगा.

कुछ सांसदों का कहना है कि वो राष्ट्रपति भवन के बाहर तंबू लगा कर तब तक रहेंगे जब तक मामले का निपटारा नहीं हो जाता है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राष्ट्रपति और संसदीय सीटों पर जीतने और हारने वाले उम्मीदवारों में कोई समझौता हो गया है लेकिन 62 में से आधे सांसद ही संसद आ रहे हैं.

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