चंदन तस्करी पर नेपाल सतर्क

नेपाल पुलिस

नेपाल के अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने लाल चंदन की भारत से चीन को होने वाली तस्करी के ख़िलाफ़ कार्रवाई तेज़ कर दी है.

ये तस्कर लाल चंदन की तस्करी के लिए नेपाल का इस्तेमाल करते हैं. हाल के समय में बड़ी मात्रा में लाल चंदन की लकड़ियाँ बरामद हुई हैं.

एक अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत लाल चंदन के अनाधिकृत व्यापार पर पाबंदी है. भारत भी इस ग़ैर क़ानूनी व्यापार पर चिंता व्यक्त करता रहा है.

नेपाली सेना के एक कर्नल को तो लाल चंदन की तस्करी में शामिल होने के आरोप में बर्ख़ास्त कर दिया गया है और वे जेल में बंद हैं. एक वरिष्ठ सैनिक अधिकारी के ख़िलाफ़ ऐसी कार्रवाई असामान्य है.

हालाँकि सेना के एक प्रवक्ता का ये कहना है कि इसका नागरिक प्रशासन की ओर से तस्करी के ख़िलाफ़ तेज़ की गई कार्रवाई से कोई लेना-देना नहीं है.

अधिकारियों का कहना है कि देश के हर सीमा शुल्क केंद्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है. उनका कहना है कि लाल चंदन की तस्करी मुख्य रूप से दक्षिणी भारत से होती है और इसे तिब्बत से होकर ग़ैर क़ानूनी रूप से चीन भेजा जाता है.

नेटवर्क

नेपाल के दक्षिणी हिस्से में भारत के साथ लगी उसकी खुली सीमा है. चीन के साथ तिब्बत होकर नेपाल उत्तर में दो सड़क मार्गों से जुड़ा हुआ है.

ज़्यादतर लाल चंदन की लकड़ियाँ सीमावर्ती इलाक़ों से बरामद हुई हैं. लाल चंदन की तस्करी वर्षों से हो रही है और कई राजनेताओं ने यह स्वीकार किया है कि इन तस्करों का नेटवर्क बहुत तगड़ा है.

कुछ वर्षों पहले बीबीसी की एक जाँच के दौरान लाल चंदन से लदा एक ऐसा वाहन पाया गया था, जिसके दो नंबर प्लेट थे. नंबर प्लेट के एक ओर चीनी राजनयिक का कोड था तो दूसरी ओर एक अन्य प्राइवेट नंबर था.

वन मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि क़रीब 200 टन लाल चंदन की लकड़ी सरकार के क़ब्जे में है और पहले कुछ भारत को लौटा दी गई हैं.

भारतीय राजनयिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि वे लाल चंदन की तस्करी पर रोक के लिए नेपाली अधिकारियों से संपर्क में हैं. ये कहा जाता है कि चीन में लाल चंदन की अच्छी क़ीमत मिलती है और इसका इस्तेमाल फ़र्नीचर बनाने में, दवा बनाने और अगरबत्ती बनाने में होता है.

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