झलनाथ खनाल ने इस्तीफ़ा दिया

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Image caption खनाल ने आखिरकार इस्तीफ़ा दे दिया है.

विपक्षी पार्टियों के दबाव तले झुकते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. वे साढ़े छह महीने पहले प्रधानमंत्री बने थे.

प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार सूर्य थापा ने बताया है कि खनाल ने रविवार शाम को राष्ट्रपति रामबरन यादव को इस्तीफ़ा सौंप दिया.

उनका इस्तीफ़ा ऐसे समय आया है जब नेपाल के नए संविधान और पाँच साल पुरानी शांति प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

सभी पार्टियाँ इस समय आंतरिक वार्ताओं में उलझी हुई हैं, इसलिए अभी स्पष्ट नहीं है कि खनाल की जगह कौन लेगा.

नेपाल की संविधान सभा का कार्यकाल 31 अगस्त को ख़त्म होना है ( जो संसद का काम भी करती है). खनाल ने इससे तीन हफ़्ते पहले अपना पद छोड़ दिया है.

राजनीतिक संकट

झलनाथ खनाल ने कहा था कि अगर वो नेपाल में शांति प्रक्रिया को पूरा करने में सफल नहीं रहे तो वे पद छोड़ देंगे.

इसमें 19000 पूर्व माओवादी विद्रोहियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करना शामिल है. मई 2008 के बाद से वे नेपाल के तीसरे प्रधानमंत्री थे.

इस साल मई में राजनीतिक पार्टियाँ इस बात पर सहमत हुई थीं कि संविधान सभा का कार्यकाल तीन महीने और बढ़ा दिया जाए.

पार्टियों ने कहा था कि इस दौरान वे संविधान का मसौदा तैयार कर लेंगी और शांति प्रक्रिया का काम भी पूरा कर लेंगी.

संविधान का मसौदा तैयार करने की समयसीमा 31 अगस्त को ख़त्म हो रही है लेकिन पार्टियाँ किसी सहमति पर नहीं पहुँची हैं.

अगर राजनीतिक दल किसी सर्वसम्मति पर नहीं पहुँचते हैं तो झलनाथ खनाल का इस्तीफ़ा नेपाल को नए संकट की ओर धकेल सकता है.

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