बांग्लादेश में ग़ैरक़ानूनी हत्याओं का आरोप

  • 24 अगस्त 2011
बांग्लादेश पुलिस इमेज कॉपीरइट BBC World Service

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बांग्लादेश के विशेष पुलिस बल रैपिड एक्शन बटैलियन (आरएबी) पर आरोप लगाया है कि वह देश में ग़ैरक़ानूनी ढंग से हत्याएँ कर रहा है.

अपनी एक रिपोर्ट में एमनेस्टी ने सरकार से अपील की है कि वह इन ग़ैरक़ानूनी हत्याओं को रोकने के अपने वादे पर अमल करे.

रिपोर्ट में कहा गया है कि आरएबी पर वर्ष 2004 में अपने गठन के बाद से अब तक 700 से अधिक ऐसी हत्याओं का आरोप है.

सरकार ने अब तक एमनेस्टी इंटरनेशनल की इस रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है.

लेकिन आरएबी के अधिकारी इन मौतों को सही ठहराते हैं और कहते हैं कि या तो इन लोगों की मौत दुर्घटनावश हुई या फिर आत्मरक्षा में हुई कार्रवाई की वजह से.

लेकिन एमनेस्टी की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि वास्तव में ये लोग गिरफ़्तार किए जाने के बाद मारे गए हैं.

इससे पहले मई में ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी इस बल पर पिछले वर्षों में मानवाधिकार हनन के कई आरोप लगाए थे.

हालांकि सरकार आरएबी के ख़िलाफ़ सभी आरोपों को नकारती रही है.

'मुक़दमा दर्ज नहीं होता'

बांग्लादेश में एमनेस्टी इंटरनेशनल के शोधकर्ता अब्बास फ़ैज़ कहते हैं, "बांग्लादेश में मुश्किल से एक हफ़्ता बीतता है जब आरएबी किसी को गोली न मारे दे और फिर अधिकारी कहें कि वह व्यक्ति गोलीबारी या मुठभेड़ में मारा गया या घायल हो गया."

वे कहते हैं, "हालांकि अधिकारी इन घटनाओं की अपनी ओर से सफ़ाई दे देतें हैं लेकिन यह तो तय है कि ये संदिग्ध ग़ैरक़ानूनी हत्याएँ हैं."

एमनेस्टी का कहना है कि जाँच से पता चलता है कि ये हत्याएं या तो आरएबी की ओर से की गई हैं या फिर सरकार की ओर से नियुक्त न्यायिक संस्था की ओर से और इन मामलों पर कभी कोई मुक़दमा दर्ज नहीं होता.

रिपोर्ट के अनुसार आरएबी हमेशा इन ग़ैरक़ानूनी हत्याओं की ज़िम्मेदारी से इनकार करता है और अधिकारी इसे स्वीकार कर लेते हैं.

एमनेस्टी की रिपोर्ट में कुछ पुराने बंदियों के हवाले से कहा गया है कि आरएबी ने हिरासत के दौरान उन्हें प्रताड़ित किया, पिटाई की गई, खाना नहीं दिया गया और न सोने का मौक़ा दिया गया और बिजली के झटके दिए गए.

रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2009 में अवामी लीग की सरकार के गठन के बाद से अब तक आरएबी के हाथों कम से कम 200 लोगों की ग़ैरक़ानूनी हत्या की गई है. जबकि प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने ग़ैरक़ानूनी हत्याएँ रोकने का वादा किया था.

पिछले कुछ बरसों में आरएबी की एक डरावनी छवि बनी है लेकिन साथ ही साथ उसे अपराध कम करने और इस्लामिक चरमपंथ की घटनाओं में कमी का श्रेय भी दिया जाता है.

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