संदिग्ध आतंकवादियों के लिए नया क़ानून

  • 31 अगस्त 2011
श्रीलंकाई सेना
Image caption एलटीटीई के ख़िलाफ कार्रवाई के समय आपात क़ानून लागू किया गया था

संदिग्ध आतंकवादियों को बिना किसी आरोप हिरासत में रखने के लिए श्रीलंका की सरकार नया क़ानून लेकर आई है.

पिछले दिनों विवादित आपातकाल क़ानून हटा दिया गया था. ये क़ानून पहली बार वर्ष 1971 में लागू हुआ था, जिसे एलटीटीई के ख़िलाफ़ लड़ाई के समय दोबारा लागू किया गया था.

लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव में पिछले दिनों श्रीलंका की सरकार ने आपातकाल क़ानून को ख़त्म करने की घोषणा की थी. इसके बाद श्रीलंका की सरकार ने क़ानून लेकर आई है.

बीबीसी के साथ इंटरव्यू में श्रीलंका के न्याय मंत्री रउफ़ हकीम ने कहा है कि आपातकाल क़ानून के तहत हिरासत में लिए गए एक हज़ार से ज़्यादा संदिग्धों को जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा.

क़ानून

उन्होंने कहा, "बारह सौ से 1500 लोग हिरासत से रिहा किए जा सकते हैं. लेकिन कुछ लोगों को हिरासत में ही रखा जाएगा."

न्याय मंत्री ने कहा कि इस श्रेणी में रखे गए लोग आतंकवादी संदिग्ध हैं, जिन्हें आरोप दायर होने तक हिरासत में रखा जाएगा.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ नए क़ानून के तहत सरकार इन संदिग्धों को जेल में रख सकती है. अगर नया क़ानून नहीं आता, तो आपातकाल क़ानून हट जाने के बाद सरकार को इन्हें रिहा करना पड़ता.

न्याय मंत्री रउफ़ हकीम ने बताया कि नया क़ानून मौजूदा आतंकवाद निरोधक क़ानून के अतिरिक्त होगा.

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की ओर से कराई गई एक जाँच रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार और एलटीटीई दोनों ने युद्ध अपराध किया है.

सरकार का कहना है कि एलटीटीआई और इससे जुड़े अन्य संगठनों पर प्रतिबंध जारी रहेगा.

वर्ष 2009 में एलटीटीई के ख़िलाफ़ युद्ध जीतने के बाद श्रीलंका की सरकार ने कहा था कि क़रीब 12 हज़ार विद्रोहियों को हिरासत में रखा गया गया है. लेकिन पिछले दो वर्षों के दौरान इनमें से ज़्यादातर को रिहा कर दिया गया.

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