हक़्क़ानी गुट का आईएसआई से संबंध से इनकार

सिराज हक़्क़ानी
Image caption सिराज हक़्क़ानी ने बताया कि अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने उनसे संपर्क किया है

अफ़ग़ानिस्तान में हक़्क़ानी नेटवर्क के नेता ने काबुल में पिछले दिनों हुए हमले में हाथ होने से और पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई से किसी तरह के संपर्क से इनकार किया है.

सिराज हक़्क़ानी ने बीबीसी की पश्तो सेवा को साक्षात्कार दिया है जिसमें बीबीसी की ओर से भेजे गए लिखित सवालों के जवाब ऑडियो के ज़रिए भेजा गया है.

सुरक्षा से जुड़े मसलों की वजह से आमने-सामने का साक्षात्कार नहीं हो सका जहाँ उनके जवाबों पर उनसे और सवाल किए जा सकते मगर बीबीसी इस ऑडियो को सिराज हक़्क़ानी के ही जवाब मान रहा है.

सवाल एक मध्यस्थ के ज़रिए भेजे गए थे और उसी ने ऑडियो के ज़रिए जवाब पहुँचाया. सिराज हक़्क़ानी इस गुट के संस्थापक जलालुद्दीन हक़्क़ानी के बेटे हैं और संगठन के अभियान में उनकी अहम भूमिका है.

इस साक्षात्कार की शुरुआत में सिराज हक़्क़ानी ने कहा, "बीबीसी के प्यारे दोस्तों आप सबको मेरा सलाम."

आरोपों से इनकार

कुछ समय पहले काबुल में हुए हमले सहित कई प्रमुख हमलों के पीछे हक़्क़ानी नेटवर्क का हाथ बताया गया था. इसमें ब्रिटिश काउंसिल और अमरीकी दूतावास को निशाना बनाने से लेकर पूर्व राष्ट्रपति बुरहानुद्दीन रब्बानी की हत्या में हाथ होने तक के आरोप हैं.

अफ़ग़ान और अमरीकी अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के साथ हक़्क़ानी नेटवर्क के गहरे संबंध हैं.

मगर सिराज हक़्क़ानी ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है.

उन्होंने कहा, "हमने पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसियों और बाक़ियों से तब चर्चा की थी जब हम सोवियत लड़ाकुओं से लड़ रहे थे, मगर जब से अमरीकियों का हमला हुआ है तब से हमारे बीच कोई संपर्क नहीं रहा है."

वैसे हक़्क़ानी ने बताया कि उनसे इस्लामी और ग़ैर-इस्लामी दोनों तरह के देशों की ख़ुफ़िया सेवाओं ने संपर्क किया है.

उनका कहना था, "इन देशों में अमरीका भी शामिल है और वे हमसे कह रहे हैं कि हम जिहाद छोड़कर अफ़ग़ान सरकार में शामिल हो जाएँ.वे हमसे शांति वार्ता में शामिल होने के लिए कह रहे हैं."

मगर हक़्क़ानी ने ये नहीं बताया कि उनके गुट का इस प्रस्ताव पर जवाब क्या होगा.

विरोधियों के लिए हक़्क़ानी एक अपराधियों के परिवार की तरह हैं. उन पर क़ीमती रत्नों के अवैध व्यापार के लेकर धन के लिए अपहरण तक करने के आरोप हैं.

साथ ही अगर पिछले दिनों अफ़ग़ानिस्तान में हुए हमलों में उनका हाथ है तो वे भावी शांति वार्ता की टेबल पर अपनी जगह सुनिश्चित करना चाहते हैं और शायद अपना हिस्सा भी.

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