अफग़ानिस्तान: आत्मघाती हमले में 17 मारे गए

  • 30 अक्तूबर 2011
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Image caption तालिबान और हक़्क़ानी गुट सुरक्षा घेरों को तोड़ने में बार-बार कामयाब रहे हैं.

काबुल में हुए एक आत्मघाती बम हमले में तेरह अमरीकी सैनिकों समेत सतरह लोगों की मौत हो गई है.

शहर के बाहर दारूलअमन इलाक़े में सैनिकों को लेकर जा रहे वाहन पर हुए इस हमले में मारे गए लोगों में तीन आम नागरिक और एक अफ़ग़ान पुलिस अधिकारी भी थे.

धमाका इतना तेज़ था कि उसकी आवाज़ शहर भर में सुनाई दी. कहा जा रहा है कि यह हाल के दिनों में हुए बड़े हमलों में से एक था.

नैटो के एक प्रवक्ता ने कहा है कि विस्फोटकों से भरी एक कार में सवार हमलावर ने ख़ुद को उड़ा लिया.

हालांकि सेना की गाड़ी बख़्तरबंद थी लेकिन धमाका इतना तेज़ था कि वो हवा में उड़ गई.

तालिबान

तालिबान ने हमले की ज़िम्मेदारी क़बूल की है.

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Image caption तालिबान अंतरराष्ट्रीय सेना की रणनीति में बदलाव के साथ ही अपनी रणनीति में फेर-बदल करने में सक्षम हैं.

समाचार एजेंसी एएफ़पी को भेजे गए एक मोबाइल संदेश में तालिबान के प्रवक्ता ज़बिउल्लाह मुजाहिद ने कहा है, "काबुल के दारूलअमन इलाक़े में विदेशी सेना को लेकर जा रही बस पर आत्मघाती हमला किया गया है."

एक दूसरी घटना में अफ़ग़ान सेना की वर्दी पहने एक व्यक्ति ने आस्ट्रेलिया के तीन सैनिकों की हत्या कर दी.

दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में हुई घटना में आक्रमणकारी भी मारा गया है.

हालांकि पिछले साल के मुक़ाबले इस साल हमलों की तादाद कम है लेकिन तालिबान और पाकिस्तान स्थित हक़्क़ानी गुट सुरक्षा घेरों को भेदने में कामयाब रहे हैं.

रणनीति में बदलाव

सितंबर में हक़्क़ानी गुट ने अमरीकी दूतावास और सेना से जुड़े एक मुख्यालय पर हमला कर दिया था जो कि बीस घंटों तक जारी रहा था.

सड़क के किनारे होनेवाले विस्फ़ोटों की तादादा तेज़ी से बढ़ी है.

बीबीसी के काबुल संवाददाता सोमरविले क्वेंटिन का कहना है कि तालिबान अपनी रणनीति में समय के साथ बड़ी जल्दी-जल्दी बदलाव करने में सक्षम हैं. वो अपनी नीतियों को अंतरराष्ट्रीय सेना के बदले रंग-ढंग के अनुरूप ढाल लेते हैं.

अमरीका की योजना है कि वो साल 2014 तक अपनी सेना को वापस बुला लेगा और देश की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी स्थानीय फ़ौज को सौंप दी जाएगी.

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