जल्द ही और क़ैदियों को रिहा करेगा बर्मा

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Image caption आंग सान सू ची बर्मा के लोगों के लिए एक उम्मीद की प्रतीक हैं

बर्मा की सरकार का कहना है कि वो जल्द ही और क़ैदियों को रिहा करने की घोषणा करने वाली हैं. बर्मा के एक अधिकारी ने कहा कि इन राजनीतिक बंदियों की रिहाई जल्दी ही की जाएगी.

सरकार ने यह घोषणा बाली में होने वाले दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान की बैठक से ठीक पहले की है.

इस ऐलान के ज़रिए बर्मा की सरकार सदस्य देशों के बीच अपनी सुधारात्मक छवि पेश करना चाहती है.

इसी साल अक्टूबर महीने में बर्मा ने 180 से ज़्यादा राजनीतिक क़ैदियों को रिहा किया था.

इनमें से कई लोग सालों से जेल में बंद थे.

उस समय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा था कि बर्मा अगर सुधारों को लेकर वाक़ई गंभीर है तो उसे और ज़्यादा राजनीतिक क़ैदियों को रिहा करना चाहिए.

आंग सान सू ची की रिहाई

उधर रविवार को लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची की नज़रबंदी से रिहाई की पहली वर्षगांठ है.

इस अवसर पर उनकी पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि आने वाले महीनों में वह उप-चुनाव लड़ सकती हैं.

अगले सप्ताह उनकी एनएलडी पार्टी इस पर फ़ैसला करेगी कि क्या पार्टी को दोबारा से राजनीतिक दल के तौर पर दर्जे कराया जाए.

पिछले साल आंग सान सू ची की रिहाई से पहले हुए चुनावों में पार्टी ने भाग नहीं लिया था.

इस कदम से राजनीति में उनकी वापसी का रास्ता खुल सकता है.

आंग सान सू ची बर्मा के लोगों के लिए एक उम्मीद की प्रतीक हैं और लोकतंत्र के समर्थन में हुए आंदोलन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदर्श हैं.

उनकी रिहाई पर कुछ लोगों ने उनकी तुलना दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद - विरोधी संघर्ष के प्रतीक रहे नेल्सन मंडेला से भी की थी.

साथ ही ऐसी शंका भी थी कि क्या उन्हें खुल कर राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने दिया जाएगा.

एक साल बाद

आंग सान सू लगातार मंत्रियों से मुलाकात करती रही हैं और कैदियों के लिए न्याय से लेकर जातीय संघर्ष के मुद्दों पर चर्चा करती रही हैं.

पिछले एक साल में बदलाव नज़र तो आया है लेकिन लोगों को इस बदलाव के बारे में विश्वास दिलाने के लिए काफ़ी कुछ करना होगा.

उनके पूर्व निजी सचिव और लोकतंत्र विपक्षी नेशनल लीग फॉर डेमॉकरेसी के केंद्रीय समिति के सदस्य विन हतेन ने कहा, ''अभी भी सशस्त्र जातीय संघर्ष के लिए एक राजनीतिक समाधान की जरूरत है. 88 जनरेशन छात्र और भिक्षुओं के मिन को नायंग सहित राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाना चाहिए. और उन लोगों के लिए कानून होना चाहिए जिससे निर्वासन से लोग देश लौट सकें. हमें ये कुछ चीज़े प्राप्त करने की उम्मीद है. तभी ठोस परिणाम देखा जाएगा.''

बर्मा अब एक दोराहे पर है. बर्मा के लोगों की उम्मीदें काफ़ी हद तक एक ही व्यक्ति पर टिकी हैं और वह हैं आंग सान सू ची.

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