हमारी शर्तें माने अमरीका: करज़ई

  • 16 नवंबर 2011
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Image caption हामिद करज़ई ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता का सम्मान करना होगा

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने अमरीकी सैनिक अड्डों के लंबे समय तक अफ़ग़ानिस्तान में बने रहने की अनुमति के लिए शर्तें रखी हैं.

राजधानी काबुल में क़बायली नेताओं के सम्मेलन यानी लोया जिरगा को संबोधित करते हुए करज़ई ने कहा कि अमरीकी सैनिकों को रात में कार्रवाई रोकनी होगी, जो अफ़ग़ानिस्तान में काफ़ी विवादित रही है.

कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित इस सम्मेलन में उन्होंने कहा कि अफ़ग़ान लोगों के घरों की तलाशी नहीं होनी चाहिए और न ही अमरीका की ओर से कोई हिरासत केंद्र चलाया जाएगा.

करज़ई ने कहा कि अगर अमरीका इन शर्तों को स्वीकार करता है तो वह अपने सैनिक अड्डे वर्ष 2014 के बाद भी बनाए रख सकता है.

राष्ट्रपति करज़ई ने यह भी कहा कि अफ़ग़ानिस्तान को इसके लिए पैसे मिलेंगे और उसके सैनिकों को प्रशिक्षण भी मिलेगा. लोया जिरगा में चरमपंथियों के साथ सुलह-सफ़ाई पर भी चर्चा चल रही है.

समझौता

उन्होंने कहा कि अमरीका के साथ कोई भी समझौता उसी समय कारगर होगा, जब अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता का सम्मान होगा.

तालिबान ने इस सम्मेलन के दौरान हमला करने की धमकी दी थी और लोया जिरगा में भाग लेने वालों को भी चेतावनी दी थी. इस लोया जिरगा में क़रीब 2000 क़बायली प्रमुख और नेता हिस्सा ले रहे हैं.

अमरीका के साथ रिश्तों पर राष्ट्रपति करज़ई ने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान के लोग चाहते हैं कि अमरीका के साथ रिश्ता दो देशों के बीच रिश्ते जैसा रहे. हम नेटो और अमरीका के साथ मज़बूत संबंध रखना चाहते हैं, लेकिन शर्तों के साथ. हम अपने देश में सरकार के साथ एक समांतर ढाँचा नहीं चाहते."

उन्होंने कहा कि वे जल्द ही कुछ अन्य इलाक़ों की भी घोषणा करेंगे, जहाँ का नियंत्रण नेटो सेना अफ़ग़ान सैनिकों को सौंपेगी.

काबुल से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इनमें दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान के वो इलाक़े भी हो सकते हैं, जो तालिबान का गढ़ माने जाते हैं.

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