हिंदुओं की संपत्ति होगी वापस

  • 29 नवंबर 2011

बांग्लादेश की संसद ने एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया है जिसके अनुसार देश के अल्पसंख्यक यानी हिंदुओं से छीनी गई संपत्तियां वापस हो सकेंगी.

1960 में एक विवादित क़ानून के तहत हिंदुओं की ज़मीनें ले ली गई थीं.

यह क़ानून पूर्वी पाकिस्तान प्रशासन ने लागू किया था और उस समय बांग्लादेश पाकिस्तान का ही हिस्सा था.

यह क़ानून पहले दुश्मन संपत्ति अधिनियम के रुप में जाना जाता था और इसके तहत उन सभी हिंदुओं की संपत्तियां ज़ब्त की गई थीं जो भारत से बांग्लादेश आए थे.

यह क़ानून 1965 में उस समय लागू किया गया था जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था.

1971 में बांग्लादेश के बनने के बाद इस क़ानून को लेकर काफ़ी विरोध हो रहा था.

अब इस क़ानून का नाम बदल कर वेस्टेड प्रॉपर्टीज़ एक्ट 2011कर दिया गया है जिसके तहत सरकार ने जो संपत्तियां ज़ब्त की हैं वो हिंदुओं को वापस करेगी.

सुप्रीम कोर्ट के वकील सुब्रत चौधरी ने बीबीसी से कहा, ‘‘ इसमें कुछ अच्छे प्रावधान हैं लेकिन इसमें इस बात का प्रावधान नहीं है कि हालिया दिनों तक पुराने क़ानून के तहत जो ज़मीनें ली गई हैं वो वापस की जाएंगी.’’

हिंदू समुदाय के नेताओं का कहना है कि 1971 में बांग्लादेश के गठन के बाद भी इस क़ानून के आधार पर भेदभाव किया जाता रहा है.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के लोगों ने पहले ही विवादित क़ानून को रद्द करने की मांग की थी.

वर्तमान में सत्तारुढ़ अवामी लीग ने 2008 में चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि अगर वो सत्ता में आए तो हिंदुओं की संपत्ति से जुड़े नियम को बदलेंगे.

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि संपत्तियां 40 साल पहले ली गई थीं इसलिए इनकी वापसी अब मुश्किल है.

संबंधित समाचार