बर्मा ने क्लिंटन यात्रा को नया अध्याय कहा, चीनी मीडिया नाराज़

  • 1 दिसंबर 2011
क्लिंटन - थेन सेन इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption थेन सेन बर्मा के सेना समर्थिक राष्ट्रपति हैं जिनकी सरकार ने कुछ राजनीतिक सुधार किए हैं

अमरीकी विदेश मत्री हिलेरी क्लिंटन की बर्मा यात्रा को बर्मा के राष्ट्रपति थेन सेन ने दोनों देशों के रिश्तों में एक मील का पत्थर बताया है.

वर्ष 1955 के बाद पहली बार कोई अमरीकी विदेश मंत्री बर्मा की यात्रा पर हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और विशेष तौर पर अमरीका की ओर से सेना समर्थित बर्मा की सरकार के ख़िलाफ़ कड़े प्रतिबंध लगे हुए हैं.

अमरीकी विदेश मंत्री ने बर्मा की राजधानी नेपियेद्वॉ में कहा कि सेना समर्थित थेन सेन सरकार के हाल के कुछ फ़ैसलों से अमरीका प्रोत्साहित हुआ है लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि जल्द ही अमरीका बर्मा पर लगे प्रतिबंधों को हटाने नहीं जा रहा है.

उन्होंने प्रतिबंधों को जल्द न हटाने के संदर्भ में बर्मा के मानवाधिकार रिकॉर्ड की बात कही है.

हिलेरी क्लिंटन ने कहा, "मैं आज यहाँ इसलिए हूँ क्योंकि मैं और राष्ट्रपति बराक ओबामा आपके और आपकी सरकार के बर्मा के लोगों के लिए हाल में उठाए कुछ क़दमों से प्रोत्साहित हुए हैं."

चीनी सरकारी मीडिया में तीखे प्रहार

उधर चीन के सरकारी मीडिया में अमरीका पर तीखे प्रहार हुए हैं.

ग्लोबल टाइम्स में एक लेख में कहा गया है - "चीन बर्मा के पश्चिमी देशों के साथ संबंध बेहतर करने के विरुद्ध नहीं है. लेकिन यदि इस दौरान उसके (चीन के) हितों के ख़िलाफ़ काम होता है तो ये उसे स्वीकार्य नहीं होगा."

पर्यवेक्षकों का मानना है कि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के हाल के एशिया-प्रशांत क्षेत्र संबंधी बयान और अमरीका के ध्यान एशिया पर केंद्रित होना चीन के इस क्षेत्र में सबसे प्रभावशाली ताकत के रूप में उभरने को टक्कर देने के लिए है.

चीन ने बर्मा में ख़ासा पूँजी निवेश किया है, विशेष तौर पर ऊर्जा के क्षेत्र में और यही कारण है कि चीन इस क्षेत्र में गतिविधियों पर पैनी नज़र रखता है.

सू ची से मिलेंगी क्लिंटन

इस साल बर्मा की सरकार ने कुछ अहम सुधार किए हैं जिनके बाद ऐसा प्रतीत होता है कि दशकों से अलग-थलग पड़ा हुआ बर्मा फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के संपर्क में आ सकता है.

फ़िलहाल अमरीका बर्मा में केवल वाणिज्य दूतावास को पूर्ण दूतावास बनाने के विषय पर विचार कर रहा है.

इस यात्रा पर गईं बीबीसी संवाददाता किम घटास ने कहा है कि अमरीकी मंत्री की यात्रा बर्मा में सुधारों का बाद उसके लिए एक पुरस्कार की तरह है और बर्मा को और क़दम उठाने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास है.

क्लिंटन गुरुवार शाम को बर्मा की प्रमुख विपक्षी नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता ऑंग सान सू ची को रंगून में मिलेंगी.

नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी की सू ची ने लगभग दो दशक क़ैद में बिताए हैं और हाल ही में उन्हें आज़ाद किया गया है और उनकी राजनीतिक पार्टी ने पंजीकरण कराया है.

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