अफ़गानिस्तान ने कतर से राजदूत वापस बुलाया

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Image caption अफ़गानिस्तान हमेशा से तालेबान के साथ बातचीत करने को लेकर शंकित रहा है

तालेबान के साथ कतर में कार्यालय के ज़रिए बातचीत करने की कोशिशों के बीच अफ़गानिस्तान ने कतर से अपना राज़दूत वापस बुलाने की घोषणा की है.

कतर में पिछले कुछ समय से एक कार्यालय खोलने की योजना पर काम हो रहा था जिसके ज़रिए अफ़गानिस्तान में सक्रिय तालेबान से बातचीत की जानी थी लेकिन इस मुद्दे पर ग़लतफहमियां पैदा हो गईं.

अफ़गानिस्तान सरकार ने बयान जारी कर कहा है कि ये फ़ैसला अफ़गानिस्तान और क्षेत्र के बदलते हालात के मद्देनज़र लिया गया है.

अफ़गानिस्तान सरकार के सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि उन्हें लगता है कि कतर सरकार ने इस बारे में उनसे ठीक से सलाह मशविरा नहीं किया.

विशेषज्ञों के अनुसार कतर में तालेबान से बातचीत के लिए कार्यालय खोलने की योजना मुश्किल भले ही दिखती हो लेकिन यह एक महत्वपूर्ण कदम होता.

अमरीका, जर्मनी और संयुक्त राष्ट्र को उम्मीद थी कि अगर ये कार्यालय खुलता तो तालेबान से बातचीत संभव हो पाती. इस कार्यालय के बारे में इसी महीने घोषणा होने वाली थी.

संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पूरे मामले में निराशा जाहिर की है. सूत्रों का कहना है कि कतर के कार्यालय को लेकर अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति और उनके सहयोगियों की कुछ चिंताएं थीं और संभवत इसी कारण कतर से राजदूत वापस बुलाने का फ़ैसला किया गया है.

अफ़गानिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि कतर इस पूरे मुद्दे पर अमरीका और जर्मनी से पूरी चर्चा कर रहा था लेकिन अफ़गानिस्तान को विश्वास में नहीं ले रहा था.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अफ़गानिस्तान इस बात के पक्ष में था कि कतर में कार्यालय खुले लेकिन ये प्रस्ताव ऐसा न लगे कि अफ़गानिस्तान तालेबान के प्रति नरम पड़ गया है.

हालांकि अभी भी कतर की राजधानी दोहा में ऐसा कार्यालय खुलने की संभावना बंद नहीं हुई है लेकिन समस्याएं कई हैं. कतर का अफ़गानिस्तान में कोई दूतावास नहीं है जिस पर अफ़गानिस्तान का विदेश मंत्रालय चिंता जताता रहा है.

अफ़गानिस्तान के सहयोगी बार बार ये कहते रहे हैं कि तालेबान के साथ बात करने में शक और स्पष्ट बातचीत न होने की आशंका हमेशा बन रहती है.

इतना ही नहीं ये बात भी पूर्ण रुप से स्पष्ट नहीं हो पाई थी कि तालेबान इन वार्ताओं को लेकर कितना सकारात्मक रुख अपनाने वाला है. हालांकि ख़बरें थीं कि तालेबान के एक वरिष्ठ नेता को कतर के कार्यालय में जाने के लिए कहा गया था.

अफ़गानिस्तान का तालेबान के प्रति हमेशा से ये रुख रहा है कि इस मुद्दे पर सबसे अधिक ज़रुरी पाकिस्तान के साथ बात करना है.

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