बंदूक की नोंक पर लिया गया इस्तीफ़ा: नाशीद

राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption मोहम्मद नाशीद ने वर्ष 2008 में चुनाव जीतने के बाद पद संभाला था

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद ने कहा है कि उनका तख़्ता पलटने के लिए सेना और पुलिस ने उन्हें 'बंदूक की नोंक पर' इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया.

उन्होंने कहा कि इस योजना की जानकारी उपराष्ट्रपति मोहम्मद वहीद हसन को थी.

नाशीद के उत्तराधिकारी बने हसन ने इसका खंडन किया है कि उन्हें तख़्ता पलट की कोई जानकारी थी.

इस बीच सुरक्षा बलों ने राजधानी माले में हुई पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम और नाशीद के समर्थकों के बीच हुई झड़पों के बाद कई लोगों को गिरफ़्तार किया है.

गत सोमवार को कई पुलिसकर्मियों के विद्रोहियों के साथ मिल जाने के बाद मंगलवार को मोहम्मद नाशीद को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

इन प्रदर्शनों की शुरुआत सरकार की ओर से एक वरिष्ठ न्यायाधीश को पद से हटाने के बाद हुई थी. सरकार ने उन पर विपक्ष की ओर मिले होने का आरोप लगाया था.

'चारों ओर बंदूकें थीं'

मोहम्मद नाशीद मालदीव में लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए पहले राष्ट्रपति थे.

अभी ये स्पष्ट नहीं है कि मोहम्मद नाशीद अपना पद छोड़ने के बाद पिछले 24 घंटे कहाँ थे.

उनके सहयोगी आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें उनकी इच्छा के विपरीत रोककर रखा गया था.

लेकिन बुधवार को वे अपने समर्थकों के सामने आए और कहा कि अपनी सत्ता वापस हासिल करने के लिए वे संघर्ष करेंगे.

उन्होंने कार्यकारी राष्ट्रपति हसन से इस्तीफ़ा देकर तुरंत चुनाव करवाने की मांग की है.

कार्यकर्ताओं के साथ हुई बैठक के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, "हाँ मुझे बंदूक की नोंक पर इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया गया. मेरे चारों ओर बंदूकें थीं और उन्होंने मुझसे कहा कि यदि मैं इस्तीफ़ा नहीं देता हूँ तो वे उनका इस्तेमाल करने में नहीं हिचकेंगे."

समाचार एजेंसी एएफ़पी को टेलीफ़ोन पर दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि मंगलवार को वे सेना मुख्यालय गए हुए थे, जहाँ उन्होंने पाया कि क़रीब 18 मध्यक्रम के सैन्य और पुलिस अधिकारियों ने सब कुछ को अपने नियंत्रण में ले रखा था.

उन्होंने कहा, "मैं उन लोगों की जान की सलामती चाहता था जो मेरी सरकार में मेरे साथ काम कर रहे थे."

उनका कहना था कि उपराष्ट्रपति वहीद हसन इस योजना का हिस्सा थे.

राष्ट्रपति का पद संभाल चुके हसन ने पलट कर आरोप लगाया है कि पिछले महीने नाशीद ने न्यायाधीश अब्दुल्ला मोहम्मद को ग़लत ढंग से गिरफ़्तार करवाया था.

उन्होंने इस बात का खंडन किया कि ऐसी कोई पूर्व योजना थी जिससे कि वे राष्ट्रपति का पद संभाल सकें.

उन्होंने कहा कि अब उनका लक्ष्य एक गठबंधन बनाने की है जिससे कि एक राष्ट्रीय सरकार का गठन हो सके.

राष्ट्रपति के चुनाव अगले वर्ष होने हैं.

विरोध प्रदर्शन

इस बीच मालदीव की राजधानी माले में गयूम और नाशीद समर्थकों को बीच झड़पें हुई हैं.

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption नए राष्ट्रपति वहीद हसन ने योजना में शामिल होने के आरोपों का खंडन किया है

पूर्व राष्ट्रपति नाशीद के नेतृत्व में मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) के हज़ारों समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया.

वहाँ मौजूद बीबीसी संवाददाता एंड्र्यू नॉर्थ का कहना है कि दंगाइयों से निपटने के लिए तैयार सेना ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े.

पत्रकारों का कहना है कि एमडीपी के समर्थकों ने पुलिस और सेना पर पेट्रोल बम फेंके और नाशीद को बहाल करने की मांग की.

माले के मुख्य चौराहे को अब सेना और पुलिस ने बंद कर दिया है.

सेना और पुलिस ने कई लोगों को गिरफ़्तार भी किया है जिनमें नाशीद सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं.

मंगलवार को इस्तीफ़े के नाटकीय घटनाक्रम के बाद शहर में सन्नाटा था लेकिन अब वहाँ स्थितियाँ सामान्य होती दिख रही है.

भारत का समर्थन

इस बीच भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद हसन को पत्र लिखकर उन्हें 'सहयोग और समर्थन' देने की बात कही है.

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि मालदीव में सुरक्षा और स्थायित्व बनाए रखने के लिए भारत प्रतिबद्ध है.

इसके बाद मालदीव के नए राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बात की है.

मोहम्मद वाहिद ने भी पदभार संभालने के बाद मनमोहन सिंह से फ़ोन पर बातचीत की है.

इस संक्षिप्त बातचीत में वाहिद ने मनमोहन सिंह से दोबारा पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच विशेष और मज़बूत संबंध है.

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार उन्होंने कहा कि वे देश के संविधान को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

संबंधित समाचार