अफगानिस्तान: जिंदा रहने के लिए लोगों का संघर्ष

  • 23 फरवरी 2012

एमनेस्टी इंटरनेशनल की नई रिपोर्ट का कहना है कि युद्ध के कारण विस्थापित हुए करीब पाँच लाख अफ़ग़ान ज़िंदा रहने के लिए रोज़ाना संघर्ष कर रहें हैं और उनकी अपनी सरकार भी उन्हें नज़रअंदाज़ करती है.

पिछले दिनों ख़बर आई थी कि काबुल के पास विस्थापितों के लिए बने शिविरों में 28 बच्चे कड़कड़ाती ठंड में मारे गए जबकि पूरे देश में ठिठुरती रातों मे्ं 40 लोगों की मौत हो चुकी है.

एमनेस्टी इंटननेशनल के होरिया मुस्दिक बताते हैं, “हज़ारों लोग शिविरों में ठिठुर रहे हैं, भुखमरी की कगार पर हैं. अफगान सरकार ने न सिर्फ इनसे मुँह मोड़ लिया है बल्कि उन तक मदद भी नहीं पहुँचने दे रही.”

वे कहते हैं, “स्थानीय अधिकारी राहत कार्यों को बाधित करते हैं क्योंकि वो दिखाना चाहते हैं कि ये लोग चले जाएँगे. ये मानवीय त्रासदी है.”

रिपोर्ट में बताया गया है कि काबुल की झुग्यियों में ही करीब 35 हज़ार विस्थापित हैं.

ये भी कहा गया है कि 2007 के बाद से संघर्ष में मारे गए नागरिकों की संख्या बढ़ी है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत से युद्ध अपराधों की जाँच करने को कहा है.

रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से आग्रह किया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि उनकी भेजी मदद विस्थापितों की ज़रूरतें पूरी करें.

संबंधित समाचार