बर्मा की महिला शव वाहक की दास्तान

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Image caption श्वे ज़े क्वात मृत लोगों के अंतिम संस्कार का इंतज़ाम करती हैं जिनके परिवारों के पास पैसे नहीं हैं.

बर्मा में एक मशहूर फ़िल्म कलाकार की पत्नी श्वे ज़े क्वात पिछले एक दशक से एक ऐसी चैरिटी संस्था चलाती हैं जो ग़रीब लोगों के अंतिम संस्कार की सुविधा मुहैया कराती है. रंगून में ये अपने क़िस्म की पहली संस्था थी हालांकि अब ऐसी कई संस्थाएं बन गई हैं.

श्वे ने जिस काम की शुरूआत की वो ग़ैर परंपरागत था और शुरूआत में काफ़ी मुश्किल भी.

श्वे कहती हैं, ईमानदारी से कहूं तो जब मैने पहली बार एक शव को उठाया तो बहुत घबराहट हुई थी. लेकिन अगर आप सोचें तो इस सच से कोई बच नहीं सकता. हम सभी को एक दिन इसी रास्ते पर चलना है. मैं समझती हूं मृत लोगों को अंतिम यात्रा की सुविधा देना बहुत सम्मानजनक सेवा है.”

सवाल-जवाब

ज़ाहिर है एक महिला होते हुए श्वे ने मृत शरीरों के लिए जो काम करना शुरू किया उस पर प्रतिक्रिया तो होनी ही थी. ख़ुद को तो समझा लिया लेकिन दुनिया को समझाना कब आसान हुआ है. श्वे के लिए भी सवाल तैयार थे.

श्वे याद करते हुए बताती हैं, शुरूआत में मेरे सभी रिश्तेदारों को भी बड़ी हैरानी होती थी कि आख़िर मुझे हो क्या गया है. वो मुझसे पूछते थे कि आख़िर मैं इस तरह का काम क्यों करती हूं. पर मैने लोगों को समझाया कि सबसे ज़्यादा ज़रूरतमंद की मदद करने से ज्यादा सुखद कुछ नहीं हो सकता. अब लोगों का नज़रिया कुछ बदल गया है.”

छोड़ने का इरादा

ऐसा नहीं है कि ये काम करते हुए कभी श्वे ने इसे छोड़ने का इरादा ना किया हो. ऐसा भी एक वक्त आय़ा जब श्वे ने सोचा कि अब अंतिम यात्रा देने की इस यात्रा का अंत कर दिया जाए.

श्वे ने बताया, “सितंबर 2007 में जब बर्मा में सैन्य शासन विरोधी आंदोलन का दौर था तो मुझे औऱ मेरे पति को गिरफ़्तार कर पूछताछ की गई. मैने एक महिला पुलिस अधिकारी से कहा कि मैं ये काम छोड़ रही हूं क्योंकि मेरा काम मुझे ग़रीबों से मिलवाता है. मैं उनके दुख देखती हूं तो कैसे लोकतंत्र के हक़ में ना रहूं. पर उस पुलिस अधिकारी ने मुझसे कहा कि मैं काम ना छोड़ूं. क्योंकि पिछले साल उसकी मां की मौत हो गई थी और मेरी संस्था ने ही उनकी अंतिम यात्रा को संभव बनाया था.”

मृत शरीरों को एक सम्मानजनक अंत देने का ख्याल श्वे की इस संस्था का मूल आधार है और कोई भी ऐसा काम जो लीक से हटकर हो सिर्फ़ एक ही चीज़ पर निर्भर करता है अपने विचार पर अटूट विश्वास...जो ना सिर्फ़ श्वे के लिए बल्कि ऐसा कोई भी सपना देखने वाली किसी भी महिला के लिए मूल मंत्र बन सकता है.

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