तालिबान हमला खुफिया तंत्र की नाकामयाबी: करजई

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अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने कहा है कि तालिबान विद्रोहियों द्वारा देश के कई शहरों में किया गया हमला, अफगान और नेटो फौजों की खुफिया सेवाओं की नाकामयाबी को दर्शाता है. हालांकि उन्होंने देश की रक्षा करने के लिए अफगान सैनिकों की तारीफ की है. पर साथ ही ये भी कहा कि विद्रोहियों की घुसपैठ की जाँच करनी होगी.

तालिबान ने कल अफगान संसद, कई पश्चिमी देशों के दूतावासों और देश के कई प्रांतों में हमले किए थे.लेकिन अफगानिस्तान के गृह मंत्री बेसमिल्लाह मोहम्मदी ने बताया है कि कल शाम को हमलावरों के साथ शुरु हुई मुठभेड़ में कुल 47 लोग मारे गए हैं. इनमें से 36 तालिबान लड़ाके हैं.

गृह मंत्री ने बताया, “ अफगान सेना की हिम्मत, कोशिशों और बलिदान की वजह से सभी चरमपंथी मारे गए.”

अधिकारियों के मुताबिक दो संदिग्ध आत्मघाती हमलावर पकड़े भी गए हैं. बताया गया है कि इनका इरादा देश के उपराष्ट्रपति मोहम्मद करीम खलीली को मारने का था.

अफगान पुलिस प्रमुख के प्रवक्ता ने बताया है कि शहर के पश्चिमी इलाके में संसद के पास लड़ रहा आखिरी हमलावर आज तड़के मारा गया.

बड़ा हमला

इससे पहले सुरक्षा बलों ने चरमपंथियों को राजधानी के केंद्रीय इलाके से बाहर कर दिया था. इसी केंद्रीय इलाके में कई देशों के दूतावास हैं.

तालिबान के हमलों के जवाब में नाटो सेना ने कार्रवाई की थी जो रात भर चली. जब सोमवार की सुबह लोग जगे तो उन्हें गोलीबारी और आसमान में उड़ते हेलीकॉप्टरों की आवाजें सुनाई दे रही थीं.

स्थानीय नागरिक मोहम्मद यासिन ने बताया, “कल रात मेरा पूरा परिवार, बच्चे सो नहीं पाए क्योंकि सब डरे हुए थे और गोलीबारी चल रही थी.”

विशेष बल उस निर्माणाधीन इमारत में घुस गए जिसे हमलावर अपने ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे.

वहां से वे 18 घंटे तक ग्रेनेड से चलने वाले रॉकेट और मशीनगनों से अंतरराष्ट्रीय इमारतों को निशाना बनाते रहे. इनमें ब्रितानी और जर्मन दूतावास भी शामिल हैं.

राजधानी काबुल के अलावा चरमपंथियों ने लोगार, पकतिया और नांगहार प्रांतों में भी हमले किए थे. तालिबान ने इन सभी हमलों की जिम्मेदारी ली है.

कल हुए हमले में काबुल में ब्रितानी, जर्मन और रूसी दूतावासों के साथ साथ नाटो मुख्यालय और अफगान संसद को भी निशाना बनाया गया था. अफगान राजधानी में यह छह महीनों में सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है.

काबुल में पिछला बड़ा हमला सितंबर में हुआ था जब चरमपंथियों ने अमरीकी दूतावास और नाटो के मुख्यालय पर हमला किया. पिछले हफ्ते ही तालिबान ने बड़े हमलों की धमकी दी थी.

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