बांग्लादेश में पुस्तक पर लगा प्रतिबंध

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Image caption बांग्लादेश में शेख मुजीबुर्रहमान से जुड़ा मुद्दा संवेदनशील माना जाता है.

बांग्लादेश की हाई कोर्ट ने देश के लोकप्रिय लेखक हुमायूं कबीर के एक राजनीतिक उपन्यास पर प्रतिबंध लगा दिया है.

कोर्ट के अनुसार इस पुस्तक में ‘ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ मरोड़’ कर पेश किया है और इसी कारण पुस्तक पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है.

1975 में बांग्लादेश में तख्तापलट के दौरान देश के संस्थापक माने जाने वाले बंगबंधु शेक मुजीबुर्रहमान और उनके परिवार के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई थी और ये पुस्तक इसी घटना के बारे में है.

बांग्लादेश के अटार्नी जनरल महबूबे आलम ने पीटीआई से कहा, ‘‘कोर्ट ने हुमायूं अहमद की किताब देयाल (दीवार) पर तब तक प्रतिबंध लगा दिया है जब तक तथ्यों को ठीक नहीं किया जाता.’’

उन्होंने बताया कि जस्टिस एएचएम शम्सुद्दीन चौधरी और जहांगीर होसैन की खंडपीठ ने शिक्षा और सूचना मंत्रालय के शीर्ष नौकरशाहों से कहा कि वो लेखक से संपर्क करें और तथ्यों को ठीक करवाएं.

कोर्ट ने इस मामले में स्वत संज्ञान लेते हुए फैसला दिया है. ये पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई है लेकिन इसके कुछ अंश बांग्ला अख़बार में छपे थे.

आलम ने कोर्ट के फ़ैसले का तर्क समझाते हुए कहा, ‘‘ ये पहला ऐसा राजनीतिक उपन्यास है जो 15 अगस्त के दिन हुई हत्याओं से जुड़ा हुआ है लेकिन इसमें तथ्यों को तोड़ा मरोड़ा गया है और हम नहीं चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियों को ग़लत संदेश जाए.’’

मुजीबुर्रहमान बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता थे. इस हत्याकांड में शेख हसीना ऐर उनकी बहन शेख रेहानास बच गई थीं क्योंकि वो देश से बाहर थीं.

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