फोनसेका: युद्ध अपराधों की जांच में सहयोग करे श्रीलंका

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Image caption रिहा होने के बाद अपनी दो बेटियों और पत्नी के साथ सरत फोनसेका

जेल से रिहा होने के एक दिन बाद श्रीलंका के पूर्व सेना प्रमुख सरथ फोनसेका ने कहा है कि उनके देश को कथित युद्ध अपराधों के लिए अंतरराष्ट्रीय जांच में सहयोग करना चाहिए.

बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान व्यवहार के लिए श्रीलंका के कुछ नेता ऐसे अपना मुंह छिपा रहे हैं कि जैसेकि वो दोषी हों.

लेकिन साल 2009 में श्रीलंकाई सेना को तमिल विद्रोहियों पर जीत दिलाने वाली सेना के प्रमुख सरथ फोनसेका हज़ारों आम लोगों के मारे जाने का खंडन करते हैं.

श्रीलंका में तमिल छापामार विद्रोही गुट एलटीटीई के विरुद्ध सरकारी सेना की जंग के बारे में अंतरराष्ट्रीय जांच की बार-बार मांग होती रही है. साल 2009 में श्रीलंका की सेना ने 26 साल से चल रहे हिंसक गृह युद्ध का अंत एलटीटीई को ख़त्म करके किया था.

उसके बाद फोनसेका और राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के बीच इस युद्ध मिली जीत का श्रेय लेने को लेकर दूरियां बढ़ गईं. फोनसेका ने राजपक्षे के खिलाफ चुनाव भी लड़ा लेकिन उन्हें साल 2010 में भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में डाल दिया गया.

श्रीलंका सेना और तमिल टाइगर्स के बीच युद्ध का अंतिम चरण काफी विवादों में रहा है और दोनों पक्षों ने युद्ध अपराधों के आरोप लगाए हैं.

मानवाधिकार गुटों का अनुमान है कि युद्ध के अंतिम चरण में 40 हज़ार तक आम लोग मारे गए थे. हाल में सरकार अपने आंकड़े पेश किए हैं जिनके अनुसार इस दौरान नौ हज़ार लोग मारे गए थे.

‘डर नहीं’

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Image caption फोनसेका ने बताया कि वो श्रीलंका की 'भ्रष्ट राजनीतिक संस्कृति' को बदलना चाहते हैं

सोमवार को रिहा होने के बाद बीबीसी दिए गए अपने पहले साक्षात्कार में सरत फोनसेका ने कहा कि श्रीलंका के कुछ नेताओं का रवैया ऐसा आभास दे रहा है कि जैसे कि वो दोषी हों.

लेकिन फोनसेका ने कहा कि युद्ध अंतिम दिनों में वो जंग की अगुवाई कर रहे थे ना कि श्रीलंका के राजनेता और वे किसी के भी सामने सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं.

उन्होंने इस आरोप का खंडन किया कि युद्ध के अंतिम चरण में हज़ारों लोग मारे गए थे.

श्रीलंकाई सेना का पूर्व अध्यक्ष ने कहा है कि वो राजनीति में इसलिए शामिल होना चाहते हैं ताकि वो देश की ‘भ्रष्ट राजनीतिक संस्कृति’ को बदल सके, और इसके लिए चाहे वो राष्ट्रपति या सांसद बने या नहीं.

तमिल टाइगर्स के साथ युद्ध में जीत के बाद जैसे ही फोनसेका ने राष्ट्रपति राजपक्षे को चुनावों में चुनौती देने की घोषणा की उनके बुरे दिन शुरू हो गए.

राष्ट्रपति चुनाव में हारने के बाद उन्होंने गिरफ़्तार करके भ्रष्टाचार आरोप में जेल में डाल दिया. अमरीका उन्हें राजनीतिक बंदी कहता रहा है.

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