पाकिस्तान को बाइपास करेगा नेटो

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नेटो के सैन्य साजो सामान को अफगानिस्तान से वापस ले जाने के लिए पाकिस्तान के साथ समझौता न हो पाने के बाद नेटो ने तीन मध्य एशियाई देशों के साथ समझौता किया है.

नेटो के महासचिव एंडर्स फ़ॉग रासमुसेन ने घोषणा की है कि कज़ाखस्तान, उज़बेकिस्तान और किरगिस्तान के साथ नेटो के वाहन और दूसरे सामान ले जाने के लिए समझौता हुआ है.

पाकिस्तान ने पिछले छह महीनों से नेटो के वाहनों के लिए रा्स्ता रोक रखा है और इसकी वजह से नेटो को अफगानिस्तान से हटने की योजना बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

एक अमरीकी हमले में 24 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत के बाद पाकिस्तान ने ये कदम उठाया है.

समझौते का मतलब

Image caption नेटो के सैनिकों की वापसी का सिलसिला इस वर्ष के अंत से तेज़ होगा

इन तीन देशों के साथ समझौते के बाद नेटो पाकिस्तान के जमीन का प्रयोग किए बिना अपने साजो सामान को अफगानिस्तान से बाहर निकाल सकेगा.

चूंकि रूस के साथ नेटो का समझौता पहले से ही है इसलिए नेटो के दसियों हज़ार वाहन, कंटेनर और दूसरे सामान वहाँ से यूरोप तक जहाज से भेजे जा सकेंगे.

हालांकि नेटो और पाकिस्तान के बीच बातचीत अभी भी चल रही है लेकिन इसमें प्रगति बहुत धीमी है.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार नेटो के लिए इन तीनों देशों और रुस के जरिए सामान भेजने की तुलना में पाकिस्तान के रास्ते का उपयोग करना छह गुना सस्ता पढ़ता.

वैसे कहा जा रहा है कि सोमवार को जो घोषणा की गई है, उसकी एक वजह पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाना भी है.

सुरक्षा का जिम्मा

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Image caption पाकिस्तान ने नेटो की आपूर्ति रोकी तो अमरीका ने नाराज़गी जताई थी

अफगानिस्तान से नेटो सेनाओं की वापसी इस वर्ष के अंत से तेज हो जाएगी.

पहले की गई घोषणा के अनुसार अगले वर्ष के मध्य तक अफगानिस्तान की सुरक्षा का सारा जिम्मा अफगान पुलिस और सेना को सौंप दिया जाएगा और फिर वर्ष 2014 तक नेटो अफगानिस्तान से पूरी तरह से निकल जाएगा.

पिछले वर्ष तक अफगानिस्तान में नेटो के एक लाख 40 हजार सैनिक थे लेकिन अब सदस्य देशों ने धीरे-धीरे अपने सैनिकों को हटाना शुरु कर दिया है.

माना जा रहा है कि 2014 में जब नेटो के सैनिक पूरी तरह से हट जाएंगे तब अफगानिस्तान के सुरक्षाकर्मियों की संख्या साढ़े तीन लाख हो जाएगी.

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