अफ़गानिस्तान को 16 अरब डॉलर की मदद

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Image caption दानदाता देश करज़ई से धनराशि के सही उपयोग का आश्वासन चाहते हैं

जापान की राजधानी टोक्यो में हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले देशों ने आने वाले चार वर्षों में अफगानिस्तान को 16 अरब गैर-सैनिक मदद देने का वादा किया है.

ये वित्तीय सहायता अमरीका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे मुल्कों से आएगी. इस सहायता का वादा करज़ई की उस सहमति के बाद आया है जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान में भ्रष्टाचार से लड़ने का भरोसा दिलाया था.

इससे पहले ये चिंता जताई जा रही थी कि नेटो फ़ौजों के अफ़ग़ानिस्तान से निकलने के बाद विद्रोह फिर भड़क उठेगा और अफ़रा-तफ़री मच जाएगी.

भ्रष्टाचार को लेकर चिंता

अपने उद्घाटन भाषण में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि मुख्य समस्या अभी भी सुरक्षा है लेकिन उनका देश एक लंबी दूरी तय कर चुका है.

समाचार एएफ़पी के अनुसार करज़ई ने कहा, "बीते दस वर्षों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहायता से संघर्ष और विनाश के ज़ख़्मों को भरने की दिशा में हमने उल्लेखनीय प्रगति की है."

उन्होंने सम्मेलन में एकत्रित हुए नेताओं को ये आश्वासन भी दिया कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार से निपटने की दिशा में काम कर रही है.

सम्मेलन की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने भी अपनी बात रखी.

उन्होंने देशों से अपील की है कि वे इन बरसों में अफ़ग़ानिस्तान में हुई प्रगति को बनाए रखने में सहायता करें.

बान की मून ने कहा, "इस समय अगर प्रशासन, न्याय, मानवाधिकार, रोज़गार और सामाजिक विकास की दिशा में निवेश नहीं किया गया तो पिछले 10 वर्षों में किया गया निवेश और बलिदान व्यर्थ चला जाएगा."

इस अहम सम्मेलन में 70 देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं.

इनमें अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भी शामिल हैं.

हिलेरी क्लिंटन के साथ यात्रा कर रहे अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि सम्मेलन में वर्ष 2012 से 2015 के बीच हर वर्ष चार अरब डॉलर की सहायता का वादा किया जा सकता है.

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Image caption नेटो की फ़ौजों को हटना अगले वर्ष से शुरु हो जाएगा

अफ़ग़ानिस्तान के केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि देश को असैन्य विकास कार्यों को लिए हर वर्ष सात अरब डॉलर की आवश्यकता होगी.

संवाददाताओं का कहना है कि टोक्यो में जो भी धनराशि देने का वादा किया जाएगा वह इस सूरत में दिया जाएगा कि अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारी ये भरोसा दिलाएँगे कि वे देश में प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारेंगे और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखेंगे.

अफ़ग़ानिस्तान से वर्ष 2014 में निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से राष्ट्रपति चुनाव करवाने का वादा भी लिया जा सकता है.

सैन्य सहायता

अफ़ग़ानिस्तान को टोक्यो में आर्थिक सहायता का जो भी वादा किया गया है वह गत मई में नेटो देशों की ओर से किए गए 4.1 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता के अतिरिक्त है.

मई में शिकागो में इस योजना पर भी सहमति बनी थी कि नेटो के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय फ़ौजें वर्ष 2013 के मध्य तक सुरक्षा का दायित्व अफ़ग़ान सुरक्षा बलों को सौंप देंगीं और वर्ष 2014 तक सभी फ़ौजें अफ़ग़ानिस्तान से निकल जाएँगीं.

वहाँ सिर्फ़ प्रशिक्षण देने वाले दस्ते बच जाएँगे.

शनिवार को जापान जाते हुए अचानक काबुल में रुक गईं हिलेरी क्लिंटन ने अफ़ग़ानिस्तान को अमरीका का 'महत्वपूर्ण ग़ैर नेटो सहयोगी' घोषित किया था.

अमरीका की इस घोषणा को अफ़ग़ानिस्तान को इस आश्वासन की तरह देखा जा रहा है कि वर्ष 2014 के बाद पश्चिमी देश अफ़ग़ानिस्तान को अकेला नहीं छोड़ने वाले हैं.

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