श्रीलंका में लगे विश्वविद्यालयों पर ही ताले

 गुरुवार, 23 अगस्त, 2012 को 16:53 IST तक के समाचार

श्रीलंका में उच्च शिक्षा के मुद्दे पर सरकार और शिक्षकों में छिड़ी बहस और तनातनी के बीच सरकार ने लगभग सभी क्लिक करें विश्वविद्यालयों को बंद करने की घोषणा कर दी है.

श्रीलंका में पिछले दो महीने से शिक्षक हड़ताल पर हैं. अकादमिक जगत का कहना है कि सरकार, शिक्षा क्षेत्र में अनचाहे रुप से हस्तक्षेप कर रही है और शिक्षा बजट बढ़ाए जाने की ज़रूरत है. हालांकि सरकार का कहना है कि शिक्षक छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हेविलैंड के मुताबिक श्रीलंका में शिक्षा क्षेत्र पर पिछले कई दशकों से बहस जारी है. छात्रों के लिए सुविधाएं और शिक्षा क्षेत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर तमिल संघर्ष की शुरुआत हुई और 1970 से 80 दशक में सिंहला विद्रोह ने हिंसक रुप लिया.

"सरकार का ये आरोप मूर्खता पूर्ण है कि हम सत्ता परिवर्तन करना चाहते हैं. शिक्षक संघ सभी पार्टियों का मिलाजुला रुप है और हमारे मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर बहस के मुद्दे हैं."

शिक्षक संघ के प्रवक्ता माहिम मेंडिस

इस साल जुलाई महीने में शुरु हुई शिक्षकों की हड़ताल का केंद्रीय मुद्दा सरकार की ओर से शिक्षा क्षेत्र का निजीकरण रहा है. श्रीलंका में शिक्षा क्षेत्र पूरी तरह से सरकारी खर्च पर निर्भर है. शिक्षकों की मांग है कि शिक्षा पर खर्च और उनका वेतन बढ़ाया जाए. इसके जवाब में सरकार ने उन 15 में से 13 विश्वविद्यालयों को बंद करने का फैसला किया है जो पूरी तरह से सरकारी खर्च पर निर्भर हैं. दो मेडिकल विश्वविद्यालयों को बंद नहीं किया गया है.

उच्च शिक्षा मंत्री ने क्लिक करें शिक्षकों पर सरकार गिराने की कोशिशों का आरोप लगाया है.

उनके मुताबिक, ''शिक्षक संघ का मकसद देश में अस्थिरता पैदा करना है. वो राजनीतिक संकट पैदा करना चाहते हैं ताकि सरकार बदल जाए.''

इस बीच बीबीसी से हुई बातचीत में शिक्षक संघ के प्रवक्ता माहिम मेंडिस ने कहा कि विश्वविद्यालयों का राजनीतिकरण और उनमें सेना का हस्तक्षेप रुकना चाहिए. उनके मुताबिक श्रीलंकाई विश्वविद्यालयों में इन दिनों मंत्रियों की पैरवी पर शीर्ष पदों की भर्ती की जा रही है.

मेंडिस के मुताबिक, ''सरकार का ये आरोप मूर्खता पूर्ण है कि हम सत्ता परिवर्तन करना चाहते हैं. शिक्षक संघ सभी पार्टियों का मिलाजुला रुप है और हमारे मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर बहस के मुद्दे हैं.''

श्रीलंका में स्कूलों के स्तर पर भी कई क्लिक करें गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं. स्कूली परिक्षाओं में प्रश्न-पत्रों की खरीद-फ़रोख्त एक बड़ी समस्या बनती जा रही है.

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