आज़ाद भारत:मुख्य पड़ाव
 
 
 
 
 
 
 
 
 
ऑपरेशन ब्लूस्टार
 
 
 
 
 
 
 
 
आज़ाद भारत के मुख्य पड़ाव

आज़ाद भारत के मुख्य पड़ाव

 

1984 में पंजाब में चरमपंथ चरम पर था. ऐसी ख़बरें थीं कि स्वर्ण मंदिर में भारी संख्या में हथियारबंद सिख चरमपंथी छिपे हुए हैं.

तमाम कोशिशों के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वर्ण मंदिर में छिपे चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई का आदेश दे दिया जो ऑपरेशन ब्लू स्टार के नाम से चर्चित हुआ.

पाँच जून को सेना ने टैंकों की आड़ में स्वर्ण मंदिर पर धावा बोल दिया. इस कार्रवाई में लगभग 800 चरमपंथी और 200 जवान मारे गए.

सिख चरमपंथी नेता संत जरनैल सिंह भिंडरावाले ने स्वर्ण मंदिर में ही शरण ली थी. बातचीत से बात न बनी तो सेना ने मार्च में ही स्वर्ण मंदिर को चारों ओर से घेर लिया. अप्रैल में सरकार सिख धर्म को मान्यता देने के लिए संविधान संशोधन करने पर राजी हो गई.

उदारवादी धरे अकाली दल ने इसका स्वागत किया लेकिन चरमपंथी इससे संतुष्ट नहीं हुए. स्वर्ण मंदिर पर कार्रवाई की आशंका उसी समय प्रबल हो गई जब तीन जून को पूरे पंजाब में 36 घंटे का कर्फ़्यू लगा दिया गया.

सैनिक कार्रवाई के बाद अकाल तख़्त के मलबे से भिंडरावाले का शव निकाला गया. ऐसा कहा जाता है कि कुछ समय तक सिख चरमपंथियों को ये विश्वास नहीं हुआ कि भिंडरावाले मारे गए हैं.

लेकिन इस कार्रवाई के बाद स्थितियाँ और बिगड़ी जिसकी शिकार ख़ुद इंदिरा गांधी हुईं. 31 अक्तूबर 1984 को इंदिरा गांधी के ही दो निजी सुरक्षा गार्डों ने उनकी गोली मार कर हत्या कर दी.
 
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