आज़ाद भारत:मुख्य पड़ाव
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
बोफ़ोर्स ने बदली सरकार
 
 
 
 
 
 
 
आज़ाद भारत के मुख्य पड़ाव

आज़ाद भारत के मुख्य पड़ाव

 

इंदिरा गांधी के बाद भारत की कमान अपने हाथों में लेने वाले राजीव गांधी का नाम 1989 में बोफ़ोर्स दलाली मामले में उछला और उन पर कई तरह के आरोप लगे.

मामले ने इतना तूल पकड़ा कि 1989 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी पराजित हो गई. जनता दल की अगुआई में वीपी सिंह की सरकार बनी. भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी दलों ने सरकार को बाहर से समर्थन देने की घोषणा की.

लेकिन महज मंडल कमीशन की दो दशक पुरानी रिपोर्ट को लागू करने का फ़ैसला उनकी सरकार को ले डूबा. पूरे देश भर में 'मंडल-कमंडल' की राजनीति शुरू हो गई.

मंडल आयोग के तहत सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को सरकारी नौकरियों में 27 फ़ीसदी आरक्षण देने का फ़ैसला हुआ.

भाजपा ने इस फ़ैसले का विरोध किया. पूरे देश में आरक्षण विरोधी आंदोलन हिंसक रूप लेने लगा. कई जगहों पर छात्रों ने आत्मदाह कर लिया और अपने सर्टिफिकेट जला दिए.

भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मंडल के जवाब में 'कमंडल' की राजनीति तेज़ करते हुए अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए रथ यात्रा शुरू कर दी.

इसी दौरान भाजपा ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया और वीपी सिंह की सरकार 11 महीनों में ही गिर गई.
 
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