आज़ाद भारत:मुख्य पड़ाव
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
बाबरी मस्जिद विध्वंस
 
 
 
 
 
 
आज़ाद भारत के मुख्य पड़ाव

आज़ाद भारत के मुख्य पड़ाव

 

लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी रथ यात्रा के दौरान अयोध्या में मंदिर बनाने के लिए जो आंदोलन शुरू किया था वो 1992 में चरम पर पहुँच गया.

विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सरीखे संगठनों के आह्वान पर कड़ाके की सर्दी में लगभग दो लाख लोग अयोध्या में जमा हुए और छह दिसंबर को महज कुछ मिनटों में ही 400 साल पुरानी बाबरी मस्जिद ज़मींदोंज हो गई.

लेकिन इस घटना के भारत के सामाजिक ताने बाने को झकझोर कर रख दिया और आपसी सौहार्द की जगह सांप्रदायिक तनाव फैलने लगा.

उस समय केंद्र में नरसिंह राव की सरकार थी. उन्होंने कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई और उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार को बर्ख़ास्त कर दिया गया. नरसिंह राव ने इस घटना को राष्ट्रीय शर्म की संज्ञा दी.

इस घटना के चलते 1947 के बाद की भयानक सांप्रदायिक हिंसा से भारत को दो-चार होना पड़ा. दो हज़ार से ज़्यादा लोग इस हिंसा के शिकार हुए.
 
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