आज़ाद भारत:मुख्य पड़ाव
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
गुजरात दंगे
 
 
 
आज़ाद भारत के मुख्य पड़ाव

आज़ाद भारत के मुख्य पड़ाव

 

गुजरात 26 जनवरी 2002 को आए विनाशकारी भूकंप से उबरा भी नहीं था कि फरवरी में सांप्रदायिक हिंसा ने पूरे प्रदेश को अपने आग़ोश में ले लिया.

दंगे को चिंगारी मिली गोधरा की घटना से. 27 फ़रवरी को गोधरा रेलवे स्टेशन पर अयोध्या से लौट रहे हिंदू तीर्थयात्रियों से भरी रेलगाड़ी के एक डिब्बे में आग लग गई जिनमें 59 तीर्थयात्री मारे गए.

रेल डब्बे में हुए इस हादसे के बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे जो कई महीनों तक चले. दंगों में 1000 से ज़्यादा लोग मारे गए थे जिनमें ज़्यादातर मुसलमान थे.

ग़ैरसरकारी संगठन मृतकों की संख्या 2000 से ज़्यादा बताते हैं. हज़ारों लोग बेघर हो गए. सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े कई मामले अभी भी अदालतों में चल रहे हैं.

गोधरा आगज़नी कांड में शामिल होने के आरोप में 99 अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया गया था जिनमें से दो अभियुक्तों - यूसुफ़ पटेल और इमरान ग़नी को अहमदाबाद की एक अदालत ने बरी कर दिया.

दंगों से निपटने के तरीके को लेकर राज्य की नरेंद्र मोदी सरकारी की आलोचना हुई और साथ ही ऐसे भी आरोप लगे कि राज्य सरकार दंगों के प्रभावित लोगों को न्याय दिलाने में नाकाम रही.
 
^^ पन्ने पर ऊपर जाने के लिए क्लिक करें