आज़ाद भारत:मुख्य पड़ाव
 
विभाजन की त्रासदी
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आज़ाद भारत:मुख्य पड़ाव
आज़ाद भारत:मुख्य पड़ाव
 

आज़ाद भारत:मुख्य पड़ाव

 

15 अगस्त 1947 की सुबह भारतवासियों ने आज़ादी की साँस ली लेकिन बँटवारे के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने सारी खुशियों को ग़मगीन कर दिया.

मुस्लिम बहुल पाकिस्तान के अलग राष्ट्र घोषित होने के बाद लाखों की संख्या में पलायन शुरू हुआ. मुसलमान तेज़ी से पाकिस्तान की ओर बढ़े तो वहाँ रह रही हिंदू आबादी भारत की ओर. और इस आपाधापी में अपनी जड़ों से उखड़े लोगों को बसाने की बड़ी समस्या सामने आई.

इसी दौरान पंजाब और बंगाल में सांप्रदायिक हिंसा तेज़ी से फैली जिनमें हज़ारों लोग मारे गए. बँटवारे से नाखुश महात्मा गाँधी ने लोगों से संयम बरतने की अपील की. फिर भी हिंसा को क़ाबू करने में महीनों लग गए.


दिल्ली, कुरुक्षेत्र और अन्य स्थानों पर बनाए गए शरणार्थी शिविरों में हज़ारों लोगों ने शरण ली.

संकट की इस घड़ी में अहिंसा के मसीहा बापू भी दुनिया से अलविदा हो गए. 30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाऊस में नाथूराम गोडसे ने महात्मा गाँधी की गोली मार कर हत्या कर दी.

कश्मीर में लड़ाई

भारत-पाकिस्तान दो अलग-अलग मुल्क तो बन गए लेकिन दोनों के बीच स्थित कश्मीर का रजवाड़ा सीमा विवाद की जड़ बन गया.

दरअसल 'इंडिया इंडिपेंडेंस एक्ट' के तहत कश्मीर को भारत या पाकिस्तान के साथ विलय का फ़ैसला करने के लिए स्वतंत्र कर दिया गया. आज़ादी के समय कश्मीर के राजा हरि सिंह ने भारत या पाकिस्तान में विलय पर कोई फ़ैसला नहीं किया था. इसी बीच 22 अक्तूबर 1947 को कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से हमले शुरू हुए.

तब राजा हरि सिंह ने 26 अक्तूबर 1947 को भारत के साथ विलय पत्र पर दस्तख़त कर दिए. इसके बाद भारतीय सेना ने मोर्चा संभाला.

भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र में गए. संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप से जनवरी, 1948 में युद्धविराम घोषित हुआ.
 
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