आज़ाद भारत:मुख्य पड़ाव
 
 
 
नेहरू युग
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आज़ाद भारत के मुख्य पड़ाव

आज़ाद भारत के मुख्य पड़ाव

 

1952 में पहले आमचुनाव हुए जिसमें कांग्रेस पार्टी भारी बहुमत से सत्ता में आई और पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने. इससे पहले वह 1947 में आज़ादी मिलने के बाद से अंतरिम प्रधानमंत्री थे.
जवाहरलाल नेहरू 1964 में अपनी मृत्यु तक प्रधानमंत्री रहे.

ब्रिटिश संसदीय प्रणाली को आधार मान कर बनाए गए भारतीय संविधान के तहत हुआ यह पहला चुनाव था जिसमें जनता ने मतदान के अधिकार का प्रयोग किया.

इस चुनाव के समय मतदाताओं की कुल संख्या 17 करोड़ 60 लाख थी जिनमें से 15 फ़ीसदी साक्षर थे.

संसद की 497 सीटों के साथ-साथ राज्यों कि विधानसभाओं के लिए भी चुनाव हुए. लेकिन जहाँ संसद में कांग्रेस पार्टी को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ वहीं कुछ राज्यों में इसे दूसरे दलों से ज़बर्दस्त टक्कर मिली.


मद्रास, हैदराबाद और त्रावणकोर में कांग्रेस पार्टी बहुमत हासिल करने में विफल रही जहाँ उसे कम्युनिस्ट पार्टी ने कड़ी टक्कर दी.

हालाँकि इन चुनावों में हिंदू महासभा और अलगाववादी सिख अकाली पार्टी को मुँह की खानी पड़ी.

पहले चुनाव के बाद से ही कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) ने दक्षिणी राज्यों में जनसमर्थन बढ़ाना शुरू कर दिया जिसके नतीजे 1957 में हुए चुनाव में उसे मिले. त्रावणकोर-कोचिन और मालाबार को मिला कर बने केरल में कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में आई.

भारत-चीन युद्ध

हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा उस समय बेमानी साबित हो गया जब सीमा विवाद को लेकर 10 अक्तूबर 1962 को चीनी सेना ने लद्दाख़ और नेफ़ा में भारतीय चौकियों पर क़ब्ज़ा कर लिया.


नेहरू ने इसे जानबूझ कर की गई कार्रवाई बताया. नवंबर में एक बार फिर चीन की ओर से हमले शुरू हुए. हालाँकि चीन ने एकतरफ़ा युद्धविराम की घोषणा कर दी. तब तक 1300 से ज़्यादा भारतीय सैनिक मारे जा चुके थे.

पंडित नेहरू के करियर का यह सबसे बुरा दौर साबित हुआ. उनकी सरकार के ख़िलाफ़ संसद में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया. कुछ कैबिनेट मंत्रियों ने भी नेहरू का विरोध करना शुरू कर दिया.

राज्यों का पुनर्गठन

नेहरू के समय में एक और अहम फ़ैसला भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का था. इसके लिए राज्य पुनर्गठन क़ानून (1956) पास किया गया.

आज़ादी के बाद भारत में राज्यों की सीमाओं में हुआ यह सबसे बड़ा बदलाव था. इसके तहत 14 राज्यों और छह केंद्र शासित प्रदेशों की स्थापना हुई.

इसी क़ानून के तहत केरल और बॉम्बे को राज्य का दर्जा मिला. संविधान में एक नया अनुच्छेद जोड़ा गया जिसके तहत भाषाई अल्पसंख्यकों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार मिला.

इसी वर्ष पॉंडिचेरी, कारिकल, माही और यनम से फ्रांसीसी सत्ता का अंत हुआ.

 
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