आज़ाद भारत:मुख्य पड़ाव
 
 
 
 
 
पहली महिला प्रधानमंत्री
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आज़ाद भारत के मुख्य पड़ाव

आज़ाद भारत के मुख्य पड़ाव

 

19 जून 1966 को इंदिरा गांधी ने भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. कांग्रेस संसदीय दल में तब मोरारजी देसाई भी प्रधानमंत्री के उम्मीदवार थे.

फ़ैसला मतदान से हुआ जिसमें इंदिरा ने मोरारजी देसाई को 169 के मुक़ाबले 355 वोटों से हरा दिया. वैसे प्रधानमंत्री की दावेदारी गुलज़ारी लाल नंदा की ओर से भी थी लेकिन इंदिरा गांधी का नाम सामने आने पर वो पीछे हट गए.

वो ऐसे समय में प्रधानमंत्री बनीं जब पूरा देश अकाल से जूझ रहा था. वर्ष 1965 और 1966 में मॉनसून ने एक बार फिर किसानों के सथ जुआ खेला. भयंकर सूखे के कारण अनाज की कमी हो गई और भारत खाद्यान्न के लिए अमरीका पर निर्भर हो गया.

इसके अलावा कांग्रेस के भीतर से भी इंदिरा गांधी को चुनौती मिल रही थी. मोरारजी देसाई ने पार्टी के भीतर से ही इंदिरा गांधी का विरोध करना शुरू कर दिया.

वर्ष 1969 में कांग्रेस का अंदरूनी अंतर्विरोध खुल कर सामने आ गया जब पार्टी अध्यक्ष एस निजलिंगप्पा ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को ही पार्टी से निष्कासित कर दिया.

लेकिन इंदिरा ने हार नहीं मानी. उसी समय राष्ट्रपति चुनाव होने थे. ख़ुद इंदिरा गांधी ने ही नीलम संजीव रेड्डी के नाम का प्रस्ताव किया था लेकिन बाद में वो पलट गईं और उन्होंने पार्टी सांसदों-विधायकों से अंतरआत्मा की आवाज़ पर मतदान करने को कहा. लगभग साफ़ हो गया था कि वो वीवी गिरी को जितवाना चाहती हैं और हुआ भी ऐसा ही.

इंदिरा गांधी ने 1967 और 1971 के आम चुनावों में भी कांग्रेस को जीत दिलाई.
 
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