2004: ये नहीं रहे 2004: ये नहीं रहे
2004: ये नहीं रहे
मलिका पुखराज

अभी तो मैं जवान हूँ....यह ग़ज़ल जब भी कहीं बजती है तो सुनने वाले के ज़हन में इसके रचयिता हफ़ीज़ जालंधरी का नाम नहीं आता-आता है तो इसकी गायिका मलिका पुखराज का.गीत-संगीत को एक नई विधा, नया अंदाज़ देने वाली गायिका मलिका पुखराज का लंबी बीमारी से जूझने के बाद नब्बे साल की उम्र में चार अप्रैल को लाहौर में निधन हो गया. चालीस के दशक में मलिका पुखराज शोहरत की बुलंदियों पर थीं. उन्होंने कई ग़ज़लों को ठुमरी का अंदाज़ दे कर एक नई ही विधा क़ायम की. आज़ादी के बाद जब पाकिस्तान बना तो वह लाहौर चली गईं और फिर आजीवन वहीं रहीं.

क्लिक करें
पिछली  
1 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12
  अगली